रिवालसर झील (त्सो पेमा): इतिहास, धार्मिक महत्व और महत्वपूर्ण तथ्य | Rewalsar Lake (Tso Pema): History, Religious Significance, and Key Facts

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित रिवालसर झील विश्व प्रसिद्ध है इससे भी हिमाचल प्रदेश मैं होने वाली परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसलिए इसे भी पूरी तरह से जानना सामान्य ज्ञान की दृष्टि से बहुत जरुरी है। आइए जानते हैं मंडी में स्थित रिवालसर के इतिहास से जुड़े कुछ तथ्य जो सामान्य ज्ञान की दृष्टि से बहुत जरुरी है। 

रिवालसर झील (त्सो पेमा): हिन्दू, बौद्ध और सिख धर्म का पवित्र तीर्थ स्थल

कहां है रिवालसर झील ?

भारत में प्रसिद्ध रिवालसर झील हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में है जिसे तैरते टापू के नाम से भी जाना जाता है। इस टापू की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 1360 मीटर (4462 फुट) है। यह एक पर्यटन स्थल है और मंडी जिले से लगभग 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक पवित्र स्थान भी है जो तीनों धर्मों  हिंदू, बौद्ध और सिख की आस्था के लिए जाना जाता है और तीनों धर्मों का इस स्थान से जुड़ा अपना-अपना इतिहास है। 

रिवालसर झील के ऐतिहासिक एवं धार्मिक तथ्य

रिवालसर झील (त्सो पेमा), मंडी हिमाचल प्रदेश का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जो हिन्दू, बौद्ध और सिख—तीनों धर्मों की आस्था का केंद्र है। प्रत्येक धर्म से जुड़ी अपनी अलग ऐतिहासिक और धार्मिक परंपराएँ हैं।

1. हिन्दू धर्म में रिवालसर झील:

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार रिवालसर झील का संबंध कई ऋषियों और देवताओं से माना जाता है। झील के किनारे प्राचीन ऋषि लोमश का मंदिर स्थित है।मान्यता है कि ऋषि लोमश ने यहाँ तपस्या की थी। झील के आसपास भगवान शिव, कृष्ण और अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी हैं। हिन्दू श्रद्धालु इस झील को पवित्र मानकर स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं। वैशाख माह में यहाँ धार्मिक मेले का आयोजन होता है।

2. बौद्ध धर्म में रिवालसर झील

बौद्ध धर्म में रिवालसर का महत्व सबसे अधिक माना जाता है।

गुरु पद्मसंभव और मंदारवा की कथा:

ऐसा मन जाता है कि लगभग 8 वीं शताब्दी में बौद्ध गुरु Padmasambhava (गुरु रिनपोछे) मंडी क्षेत्र में आए थे। यहां आकर उन्होंने राजा अरशधार की पुत्री राजकुमारी मंदारवा जो पुराने जहोर/सहोरा की राजकुमारी थी को बौद्ध धर्म की शिक्षा दी। राजा अरशधार को यह पसंद नहीं था इसलिए उसने गुरु रिनपोछे को जिंदा जलाने का आदेश दिया। ऐसी मान्यता है कि ये अग्नि कुंड लगभग साथ दिन तक नहीं बुझा और जलता रहा। 

जब राजा ने साथ दिन के बाद इस स्थान का दौरा किया तो उस अग्नि कुंड की जगह एक झील का निर्माण हो गया था और इस इसके बीच एक कमल का फूल खिल रहा था जिस पर गुरु  गुरु पद्मसंभव  बैठे या विराजमान थे। इसीलिए लिए इसे तिबती लोग  "त्सो पेमा" के नाम से पुकारते हैं जिसका अर्थ होता है "कमल की झील"। माना जाता है कि यहीं से गुरु पद्मसंभव तिब्बत गए और वहाँ बौद्ध धर्म का प्रचार किया। रिवालसर आज तिब्बती बौद्धों का प्रमुख तीर्थस्थल है।

यहाँ कई बौद्ध गोम्पा (मठ) और गुरु पद्मसंभव की विशाल प्रतिमा स्थित है।

3. सिख धर्म में रिवालसर झील

सिख इतिहास में भी रिवालसर का विशेष स्थान है।

सिखों के दसवें गुरु Guru Gobind Singh सन् 1701 के आसपास रिवालसर आए थे। कहा जाता है कि उन्होंने पहाड़ी रियासतों के शासकों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें की थीं। गुरु गोबिंद सिंह जी ने  यहाँ लगभग एक माह तक प्रवास किया। उनकी स्मृति में झील के किनारे "Gurudwara Rewalsar Sahib" का निर्माण किया गया। आज यह गुरुद्वारा सिख श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • स्थान: मंडी जिला, हिमाचल प्रदेश
  • अन्य नाम: त्सो पेमा (Tso Pema)
  • ऊँचाई: लगभग 1360 मीटर
  • धार्मिक महत्व: हिन्दू, बौद्ध और सिख धर्म का साझा तीर्थ
  • संबंधित व्यक्तित्व: गुरु पद्मसंभव, मंदारवा, गुरु गोबिंद सिंह
  • विशेषता: तैरते हुए सरकंडों के द्वीप (Floating Islands)

धर्म

प्रमुख व्यक्तित्व

विशेष महत्व

हिन्दू

ऋषि लोमश

तपोभूमि और प्राचीन मंदिर

बौद्ध

गुरु पद्मसंभव, मंदारवा

त्सो पेमा (कमल झील), तिब्बती बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थ


महत्वपूर्ण MCQ

प्रश्न: रिवालसर झील को तिब्बती भाषा में क्या कहा जाता है?
उत्तर: त्सो पेमा (Tso Pema)

प्रश्न: रिवालसर झील किस जिले में स्थित है?
उत्तर: मंडी

प्रश्न: रिवालसर झील का संबंध किस बौद्ध गुरु से है?
उत्तर: गुरु पद्मसंभव (गुरु रिनपोछे)

प्रश्न: रिवालसर में किस सिख गुरु ने प्रवास किया था?
उत्तर: गुरु गोबिंद सिंह

प्रश्न: रिवालसर झील किस तीन धर्मों का साझा तीर्थ है?
उत्तर: हिन्दू, बौद्ध और सिख धर्म।

Rakesh Kumar

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