हिमाचल प्रदेश की प्रमुख पहाड़ी रियासतें | स्थापना, संस्थापक | Hill States of Himachal Pradesh

हिमाचल प्रदेश की प्रमुख पहाड़ी रियासतें | स्थापना, संस्थापक और इतिहास

परिचय

हिमाचल प्रदेश की प्रमुख पहाड़ी रियासतें हिमालय के राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। वर्तमान हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्राचीन और मध्यकाल से ही अनेक छोटे-बड़े राज्य, ठकुराइयाँ और रियासतें अस्तित्व में थीं। इन राज्यों का शासन अलग-अलग राजवंशों और राजपूत कुलों के हाथों में रहा। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां बड़े साम्राज्यों के बजाय अनेक स्थानीय शक्तियों का विकास हुआ।

कांगड़ा, चंबा, कुल्लू, बुशहर, सिरमौर, मंडी, सुकेत और बिलासपुर जैसे बड़े राज्यों के साथ-साथ शिमला की पहाड़ियों में अनेक छोटी रियासतें भी थीं। मुगल काल में इन पहाड़ी राज्यों ने परिस्थितियों के अनुसार मुगल सत्ता के साथ संबंध बनाए। बाद में सिख और गोरखा शक्तियों के प्रभाव का सामना करना पड़ा तथा 19वीं शताब्दी में अधिकांश रियासतें ब्रिटिश राजनीतिक व्यवस्था के अधीन आ गईं।

स्वतंत्रता के बाद इन रियासतों के एकीकरण से हिमाचल प्रदेश के निर्माण की आधारशिला पड़ी। 15 अप्रैल 1948 को 30 छोटी-बड़ी पहाड़ी रियासतों के विलय से हिमाचल प्रदेश अस्तित्व में आया।


1. हिमाचल की 30 रियासतें और उनका विलय

15 अप्रैल 1948 को जिन 30 पंजाब एवं शिमला हिल स्टेट्स का विलय हुआ, वे थीं:

बघाट, भज्जी, बाघल, बेजा, बलसन, बुशहर, चंबा, दार्कोटी, देलथ, धाड़ी, धामी, घुंड, जुब्बल, खानेटी, क्योंथल, कोटी, कुमारसैन, कुनिहार, कुठार, मंडी, मधान, महलोग, मंगल, रतेश, रावींरगढ़, सांगरी, सिरमौर, सुकेत, ठरौच और ठियोग।

इन 30 राज्यों से उस समय हिमाचल प्रदेश के चंबा, महासू, मंडी और सिरमौर नामक चार जिले बने थे।


2. प्रमुख रियासतें: संस्थापक और स्थापना

नोट: नीचे “स्थापना वर्ष” में जहाँ ऐतिहासिक परंपरा स्पष्ट है वहाँ वर्ष दिया गया है। कई छोटी रियासतों के लिए सटीक स्थापना-वर्ष उपलब्ध नहीं है, इसलिए वहाँ शताब्दी या “निश्चित नहीं” दिया गया है। इससे परीक्षा सामग्री में गलत निश्चित वर्ष देने से बचा जा सकता है।

क्रमरियासतसंस्थापक/संस्थापक वंशस्थापना
1चंबामरु वर्मन/वर्मन वंश; बाद में साहिल वर्मन ने राज्य को संगठित कियालगभग 6वीं शताब्दी
2मंडीबाहु सेनलगभग 1000 ई.
3सुकेतवीर सेन/बीर सेनलगभग 765 ई.
4सिरमौरशुभंश/सुभंश प्रकाश परंपरालगभग 11वीं शताब्दी
5बुशहरपरंपरा में प्रद्युम्न; ऐतिहासिक मत में डनबर/दनबर सिंहपरंपरागत रूप से प्राचीन; एक मत 1412 ई.
6बाघलअजे देव/अजय देव, पंवार परंपरालगभग 13वीं–14वीं शताब्दी
7बघाटबसंत पाल/हरि चंद पाल की परंपरालगभग 15वीं–16वीं शताब्दी
8भज्जीचारु/चारू, कुटलेहर वंश की शाखानिश्चित नहीं
9कोटीचंद/चंद्र, कुटलेहर वंश की शाखानिश्चित नहीं
10कुनिहारअभोज देव1154 ई.
11क्योंथलगिरि सेन1211 ई.
12कुठारसूरत चंदनिश्चित नहीं
13महलोगहरि चंदनिश्चित नहीं
14बेजाराजपूत/तुनार गोत्र की परंपरा; धोल चंद वंशनिश्चित नहीं
15बलसनअलक/अलक सिंह, सिरमौर की शाखा12वीं शताब्दी से पूर्व का परंपरागत उल्लेख
16दार्कोटीदुर्गा सिंह, कछवाहा परंपरालगभग 11वीं शताब्दी
17धामीगोविंद पाल, चौहान वंश परंपरालगभग 13वीं शताब्दी
18जुब्बलकरण चंद, सिरमौर के उग्र/उगर चंद की शाखामध्यकाल
19रावींरगढ़दूनी चंदमध्यकाल
20सारीमूल चंदमध्यकाल
21देलथपृथ्वी सिंहमध्यकाल
22खानेटीसाबिर चंदमध्यकाल
23कुमारसैनकिरात चंदमध्यकाल
24ठरौचकिशन सिंह, सिसोदिया परंपरानिश्चित नहीं
25धाड़ीस्थानीय राजपूत शाखानिश्चित नहीं
26घुंडजनजन सिंहमध्यकाल
27मधानभूप सिंहमध्यकाल
28ठियोगजयस/जैस चंदमध्यकाल
29रतेशराय सिंह, सिरमौर की शाखामध्यकाल
30सांगरीस्थानीय राजपूत शाखानिश्चित नहीं

क्योंथल के लिए हिमाचल विश्वविद्यालय की सामग्री 1211 ई. में गिरि सेन को संस्थापक बताती है। उसी स्रोत में कुनिहार के लिए अभोज देव, बाघल-बघाट के लिए अजे देव और बीजे देव तथा भज्जी-कोटी के लिए कुटलेहर की शाखाओं का उल्लेख मिलता है।

कुनिहार की 1154 ई. में अभोज देव द्वारा स्थापना का उल्लेख जनगणना विभाग के जिला हैंडबुक में भी मिलता है।


3. चंबा रियासत

चंबा हिमाचल प्रदेश की सबसे प्राचीन पहाड़ी रियासतों में से एक थी। चंबा के इतिहास में वर्मन वंश का विशेष महत्व है। राजा साहिल वर्मन ने चंबा क्षेत्र में फैली अनेक छोटी शक्तियों को एकीकृत किया और चंबा को मजबूत राजनीतिक केंद्र बनाया।

चंबा के आधिकारिक इतिहास के अनुसार साहिल वर्मन के समय क्षेत्र में अनेक राणा और छोटे सरदार थे जिन्हें पराजित करके राज्य को संगठित किया गया। बाद में चंबा राज्य ने अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखी।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • प्रमुख राजवंश — वर्मन
  • प्रमुख शासक — साहिल वर्मन
  • प्रमुख राजधानी — चंबा
  • आधुनिक काल में ब्रिटिशों के साथ विशेष राजनीतिक संबंध रहे

4. मंडी रियासत

मंडी रियासत की स्थापना का संबंध सेन वंश से माना जाता है। मंडी का राजनीतिक इतिहास सुकेत से भी जुड़ा रहा। समय के साथ मंडी एक स्वतंत्र और प्रभावशाली पहाड़ी राज्य के रूप में विकसित हुआ।

मंडी की भौगोलिक स्थिति इसे कुल्लू, सुकेत, बिलासपुर और कांगड़ा क्षेत्रों से जोड़ती थी। बाद में ब्रिटिश काल में मंडी एक महत्वपूर्ण पहाड़ी रियासत रही।


5. सुकेत रियासत

सुकेत हिमाचल की प्राचीन पहाड़ी रियासतों में से एक थी। इसके संस्थापक के रूप में वीर सेन/बीर सेन का नाम मिलता है।

सुकेत का इतिहास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे आगे चलकर मंडी और शिमला पहाड़ियों की कुछ छोटी रियासतों के राजनीतिक संबंध जुड़े।

परीक्षा तथ्य:
सुकेत — वीर सेन — सेन वंश


6. सिरमौर रियासत

सिरमौर दक्षिण-पूर्वी हिमाचल की प्रमुख रियासत थी। इसका संबंध प्राचीन सिरमौर राजवंश से था। कालांतर में सिरमौर ने गिरी नदी तथा यमुना के आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिका निभाई।

सिरमौर से ही आगे चलकर रतेश, बलसन और अन्य छोटी राजनीतिक शाखाओं के संबंध बताए जाते हैं।


7. बुशहर रियासत

बुशहर हिमाचल की सबसे महत्वपूर्ण पुरानी पहाड़ी रियासतों में से एक थी। इसका मुख्य क्षेत्र सतलुज घाटी और वर्तमान शिमला तथा किन्नौर क्षेत्र से जुड़ा था।

बुशहर के संस्थापक के संबंध में दो प्रमुख परंपराएं मिलती हैं। एक परंपरा इसे प्रद्युम्न, भगवान कृष्ण के पुत्र, से जोड़ती है। दूसरी ऐतिहासिक परंपरा में डनबर सिंह को संस्थापक बताया गया है और C. F. Kennedy के अनुसार स्थापना 1412 ई. मानी गई है। इसलिए वेबसाइट पर किसी एक मत को निर्विवाद तथ्य के रूप में लिखने के बजाय दोनों मत देना अधिक उचित है।


8. बाघल रियासत

बाघल, जिसे बाद में अर्की राज्य के नाम से भी जाना गया, सोलन क्षेत्र की महत्वपूर्ण रियासत थी।

इसका संस्थापक अजे देव/अजय देव माना जाता है। हिमाचल विश्वविद्यालय की सामग्री इसे पंवार राजपूत परंपरा से जोड़ती है। उपलब्ध स्रोतों में इसकी स्थापना की तिथि में अंतर मिलता है, इसलिए इसे लगभग 13वीं–14वीं शताब्दी के आसपास रखना अधिक सुरक्षित है।


9. बघाट रियासत

बघाट वर्तमान सोलन क्षेत्र की प्रमुख छोटी रियासतों में से थी। इसके शासक परिवार की उत्पत्ति के संबंध में बसंत पाल अथवा हरि चंद पाल का उल्लेख मिलता है।

बघाट की राजधानी बाद में सोलन बनी। यह राज्य कई बार बड़े पड़ोसी राज्यों के प्रभाव में आया और ब्रिटिश काल में इसे पुनः राजनीतिक मान्यता मिली।


10. कुनिहार रियासत

कुनिहार का इतिहास अपेक्षाकृत अच्छी तरह दर्ज है। इसका संस्थापक अभोज देव था, जो अखनूर क्षेत्र से आया था।

1154 ई. में अभोज देव द्वारा कुनिहार राज्य की स्थापना का उल्लेख जिला जनगणना हैंडबुक में मिलता है।

परीक्षा तथ्य:
कुनिहार — अभोज देव — 1154 ई.


11. क्योंथल रियासत

क्योंथल की स्थापना गिरि सेन ने लगभग 1211 ई. में की थी। वह सुकेत के संस्थापक वीर सेन का छोटा भाई बताया जाता है।

क्योंथल बाद में शिमला की पहाड़ी रियासतों में महत्वपूर्ण स्थान रखने लगा।


12. कुठार रियासत

कुठार के संस्थापक सूरत चंद माने जाते हैं। परंपरा के अनुसार वे कश्मीर के किश्तवाड़ क्षेत्र से आए थे और उन्होंने स्थानीय क्षेत्र पर अधिकार स्थापित किया।

उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोत स्थापना की निश्चित तारीख नहीं देते।


13. महलोग रियासत

महलोग के शासक परिवार की परंपरा हरि चंद से जुड़ी बताई जाती है। एक अन्य परंपरा इसे अयोध्या के राजा बीर चंद से जोड़ती है।

महलोग वर्तमान सोलन क्षेत्र में स्थित था और विभिन्न समयों में कांगड़ा, बघाट तथा बिलासपुर जैसी शक्तियों के प्रभाव में रहा।


14. भज्जी और कोटी

भज्जी और कोटी दोनों का संबंध कुटलेहर की राजवंशीय शाखा से बताया जाता है।

हिमाचल विश्वविद्यालय के इतिहास पाठ्यक्रम में इन्हें राजा रामपाल के दूसरे और तीसरे पुत्रों से जुड़ा बताया गया है। चारु ने भज्जी और चंद ने कोटी की स्थापना की।


15. धामी रियासत

धामी की स्थापना गोविंद पाल से संबंधित मानी जाती है। शासक परिवार को चौहान राजपूत और पृथ्वीराज चौहान की वंश परंपरा से जोड़ा जाता है।

धामी का इतिहास आधुनिक काल में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां धामी गोलीकांड और प्रजामंडल आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम हुए।


16. जुब्बल रियासत

जुब्बल के संस्थापक के रूप में करण चंद का नाम मिलता है। उपलब्ध हिमाचली ऐतिहासिक सामग्री के अनुसार करण चंद, सिरमौर के उग्र/उगर चंद की शाखा से संबंधित था। उसके भाइयों मूल चंद और दूनी चंद से क्रमशः सारी और रावींरगढ़ की शाखाओं का संबंध बताया जाता है।


17. कुमारसैन, खानेटी और देलथ

इन तीनों का इतिहास आपस में जुड़ा हुआ है।

कुमारसैन की स्थापना किरात चंद से,
खानेटी की स्थापना साबिर चंद से तथा
देलथ की स्थापना पृथ्वी सिंह से जोड़ी जाती है।

इन छोटी रियासतों ने सतलुज, पब्बर और टौंस घाटियों के राजनीतिक इतिहास में भूमिका निभाई।


18. दार्कोटी

दार्कोटी शिमला पहाड़ियों की बहुत छोटी रियासत थी। परंपरा के अनुसार इसकी स्थापना दुर्गा सिंह कछवाहा ने लगभग 11वीं शताब्दी में की थी।

गोरखा काल में दार्कोटी पर भी गोरखाओं का अधिकार रहा, लेकिन 1815 के बाद ब्रिटिश विजय के साथ स्थानीय शासकों को पुनः सत्ता मिली।


19. ठरौच

ठरौच शिमला पहाड़ियों की छोटी रियासतों में शामिल था। इसके संस्थापक के रूप में किशन सिंह, सिसोदिया राजपूत परंपरा से संबंधित नाम मिलता है।


20. घुंड, मधान और ठियोग

इन तीनों रियासतों का इतिहास आपस में जुड़ा हुआ था और इन्हें काहलूर/चंदेल राजपूत परंपरा से जोड़ा जाता है।

  • घुंड — जनजन सिंह
  • मधान — भूप सिंह
  • ठियोग — जैस/जयस चंद

इन संस्थापकों का उल्लेख हिमाचली इतिहास संबंधी अध्ययन सामग्री में मिलता है।


21. रतेश और बलसन

रतेश और बलसन को सिरमौर की पुरानी शाखाओं से जोड़ा जाता है।

रतेश के संस्थापक के रूप में राय सिंह, जो सिरमौर के शासक परिवार की शाखा से संबंधित बताए जाते हैं, का उल्लेख मिलता है।

बलसन को भी प्राचीन सिरमौर की शाखा माना जाता है। कुछ ऐतिहासिक विवरणों में अलक सिंह का नाम मिलता है।


22. 1948 में हिमाचल प्रदेश का निर्माण

भारत की स्वतंत्रता के बाद पहाड़ी रियासतों के सामने उनके राजनीतिक भविष्य का प्रश्न था। विभिन्न रियासतों को एक प्रशासनिक इकाई में मिलाने की प्रक्रिया शुरू हुई।

15 अप्रैल 1948 को 30 पंजाब एवं शिमला हिल स्टेट्स के एकीकरण से हिमाचल प्रदेश एक मुख्य आयुक्त प्रांत के रूप में अस्तित्व में आया। हिमाचल सरकार के अनुसार उस समय राज्य में चार जिलेचंबा, महासू, मंडी और सिरमौर—थे।

इसके बाद बिलासपुर को 1 जुलाई 1954 को हिमाचल प्रदेश में मिला दिया गया। इसलिए बिलासपुर को 1948 की 30 रियासतों में शामिल नहीं करना चाहिए।


23. 30 रियासतों के विलय का महत्व

हिमाचल प्रदेश के निर्माण में इन 30 रियासतों का विलय ऐतिहासिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण था। इससे अलग-अलग राजनीतिक इकाइयों को एक प्रशासनिक व्यवस्था में लाया गया।

इस एकीकरण के बाद हिमाचल का राजनीतिक विकास कई चरणों से गुजरा। 1954 में बिलासपुर का विलय हुआ, 1966 में पंजाब के पहाड़ी क्षेत्रों का हिमाचल में पुनर्गठन हुआ और अंततः 25 जनवरी 1971 को हिमाचल प्रदेश पूर्ण राज्य बना।


24. परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

  • हिमाचल प्रदेश का गठन — 15 अप्रैल 1948
  • 1948 में विलय — 30 पंजाब एवं शिमला हिल स्टेट्स
  • 1948 में प्रारंभिक जिले — चंबा, महासू, मंडी और सिरमौर
  • बिलासपुर का हिमाचल में विलय — 1 जुलाई 1954
  • हिमाचल का पूर्ण राज्य का दर्जा — 25 जनवरी 1971
  • क्योंथल के संस्थापक — गिरि सेन
  • क्योंथल की स्थापना — 1211 ई.
  • कुनिहार के संस्थापक — अभोज देव
  • कुनिहार की स्थापना — 1154 ई.
  • दार्कोटी के संस्थापक — दुर्गा सिंह
  • धामी के संस्थापक — गोविंद पाल
  • जुब्बल के संस्थापक — करण चंद
  • खानेटी के संस्थापक — साबिर चंद
  • देलथ के संस्थापक — पृथ्वी सिंह
  • कुमारसैन के संस्थापक — किरात चंद
  • रतेश के संस्थापक — राय सिंह
  • भज्जी के संस्थापक — चारु
  • कोटी के संस्थापक — चंद
  • घुंड के संस्थापक — जनजन सिंह
  • मधान के संस्थापक — भूप सिंह
  • ठियोग के संस्थापक — जैस/जयस चंद

25. 1948 में विलय हुई 30 रियासतों की सूची

बघाट, भज्जी, बाघल, बेजा, बलसन, बुशहर, चंबा, दार्कोटी, देलथ, धाड़ी, धामी, घुंड, जुब्बल, खानेटी, क्योंथल, कोटी, कुमारसैन, कुनिहार, कुठार, मंडी, मधान, महलोग, मंगल, रतेश, रावींरगढ़, सांगरी, सिरमौर, सुकेत, ठरौच और ठियोग।

ध्यान दें: विभिन्न पुस्तकों में कुछ नामों की वर्तनी—जैसे क्योंथल/केओन्थल, बुशहर/बुशाहर, दार्कोटी/डार्कोटी, रावींरगढ़/रावीनगढ़—अलग मिल सकती है।


निष्कर्ष

हिमाचल प्रदेश की प्रमुख पहाड़ी रियासतों का इतिहास केवल राजाओं और राजवंशों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह हिमालय के राजनीतिक एकीकरण की लंबी प्रक्रिया को समझने का माध्यम भी है। चंबा, मंडी, सुकेत, सिरमौर, बुशहर, बाघल और क्योंथल जैसी प्रमुख रियासतों के साथ अनेक छोटी रियासतों ने भी हिमाचल के इतिहास को आकार दिया।

इन रियासतों में से 30 पंजाब एवं शिमला हिल स्टेट्स का 15 अप्रैल 1948 को एकीकरण आधुनिक हिमाचल प्रदेश के निर्माण की पहली बड़ी राजनीतिक उपलब्धि थी। इसके बाद बिलासपुर का 1954 में विलय, 1966 में पंजाब के पहाड़ी क्षेत्रों का समावेश और अंततः 25 जनवरी 1971 को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने से वर्तमान हिमाचल प्रदेश का स्वरूप विकसित हुआ।

 

Rakesh Kumar

नमस्कार! मैं राकेश कुमार हूँ। मुझे शिक्षा एवं सामान्य ज्ञान के क्षेत्र में लगभग 20 वर्षों का शिक्षण अनुभव है। GKPustak की स्थापना विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों तथा ज्ञान के प्रति रुचि रखने वाले पाठकों तक सरल, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुँचाने के उद्देश्य से की गई है। इस वेबसाइट पर सामान्य ज्ञान (GK), हिमाचल प्रदेश सामान्य ज्ञान, भारत सामान्य ज्ञान, कंप्यूटर ज्ञान, मनोविज्ञान, शिक्षा, करंट अफेयर्स तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। मेरा प्रयास है कि जटिल विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाए ताकि प्रत्येक विद्यार्थी आसानी से सीख सके और अपनी परीक्षा की तैयारी को बेहतर बना सके। GKPustak में आपका स्वागत है। ज्ञान ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

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