हिमाचल प्रदेश और मध्यकाल | उत्तर मुगल काल और पहाड़ी राज्य | 1707–1783 ई.| The Post-Mughal Period and the Hill States | 1707–1783 CE

हिमाचल प्रदेश का मध्यकालीन इतिहास  | उत्तर मुगल काल और पहाड़ी राज्य (1707 ई. से 1783 ई.)

परिचय

1707 ई. में औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य की केंद्रीय शक्ति लगातार कमजोर होने लगी। दिल्ली का प्रभाव पंजाब और हिमालय की पहाड़ी रियासतों पर भी कम होने लगा। इस राजनीतिक अस्थिरता का लाभ उठाकर हिमाचल प्रदेश की अनेक पहाड़ी रियासतों ने अपनी स्वतंत्रता और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने का प्रयास किया।

18वीं शताब्दी में हिमाचल के पहाड़ी राज्यों की राजनीति पर मुगलों, अफगानों, सिखों और स्थानीय राजाओं का प्रभाव दिखाई देता है। इस समय नादिरशाह का आक्रमण, अहमद शाह दुर्रानी (अब्दाली) के आक्रमण, अदीना बेग का प्रभाव तथा कांगड़ा के राजा घमंड चंद का उदय महत्वपूर्ण घटनाएँ थीं।

कांगड़ा इस दौर की राजनीति का प्रमुख केंद्र था। 1752 ई. में दिल्ली के कमजोर मुगल शासकों ने पंजाब के क्षेत्रों पर अहमद शाह दुर्रानी का प्रभाव स्वीकार किया, लेकिन पहाड़ी शासकों ने परिस्थितियों का लाभ उठाकर व्यावहारिक रूप से अपनी स्वतंत्रता बढ़ा ली।


1. 1707 ई. के बाद मुगल सत्ता का पतन

1707 ई. में मुगल सम्राट औरंगजेब की मृत्यु हुई। उसके बाद उत्तराधिकार के संघर्ष और कमजोर शासकों के कारण मुगल साम्राज्य की केंद्रीय सत्ता कमजोर होने लगी।

इसका हिमाचल के पहाड़ी राज्यों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा।

प्रमुख प्रभाव

  • पहाड़ी राजाओं ने मुगल नियंत्रण से मुक्त होने का प्रयास किया।
  • स्थानीय रियासतों के बीच संघर्ष बढ़े।
  • पंजाब में अफगान और सिख शक्ति का उदय हुआ।
  • मुगल अधिकारियों ने कई क्षेत्रों में स्वतंत्र या अर्ध-स्वतंत्र व्यवहार करना शुरू किया।
  • कांगड़ा के कटोच शासकों को अपनी पुरानी शक्ति पुनः प्राप्त करने का अवसर मिला।
  • बाहरी शक्तियों—विशेषकर अहमद शाह दुर्रानी और सिख मिसलों—का प्रभाव पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंचा

इस प्रकार 1707 ई. के बाद का काल हिमाचल के लिए मुगल प्रभुत्व के कमजोर होने और स्थानीय पहाड़ी शक्तियों के पुनरुत्थान का काल था।


2. नादिरशाह का आक्रमण — 1739 ई.

यहाँ परीक्षा के लिए एक बात विशेष रूप से याद रखें:

नादिरशाह का भारत पर आक्रमण — 1739 ई.

यह 1707 ई. नहीं था। 1707 ई. औरंगजेब की मृत्यु का वर्ष था।

ईरान के शासक नादिरशाह ने 1739 ई. में भारत पर आक्रमण किया। उसने मुगल सम्राट मुहम्मद शाह को पराजित किया और दिल्ली पर अधिकार कर लिया।

हिमाचल पर प्रभाव

नादिरशाह का मुख्य अभियान सीधे हिमाचल की पहाड़ी रियासतों को जीतने के लिए नहीं था, लेकिन उसके आक्रमण ने मुगल साम्राज्य की कमजोरी को स्पष्ट कर दिया।

इसके परिणामस्वरूप:

  • पंजाब में मुगल सत्ता कमजोर हुई।
  • पहाड़ी रियासतों पर दिल्ली का प्रभाव और कम हुआ।
  • अफगान शक्ति के लिए पंजाब में प्रवेश का रास्ता आसान हुआ।
  • आगे चलकर अहमद शाह दुर्रानी ने पंजाब और उत्तर-पश्चिम भारत में अपनी शक्ति स्थापित की।
  • पहाड़ी राजाओं को अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिला।

परीक्षा तथ्य

प्रश्न: नादिरशाह ने भारत पर कब आक्रमण किया?
उत्तर: 1739 ई.

प्रश्न: नादिरशाह किस देश का शासक था?
उत्तर: ईरान/फारस।

प्रश्न: नादिरशाह के आक्रमण के समय मुगल सम्राट कौन था?
उत्तर: मुहम्मद शाह।


3. अदीना बेग का उदय और पहाड़ी राज्य

18वीं शताब्दी के मध्य में पंजाब की राजनीति में अदीना बेग खान एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में उभरा।

वह मुगल प्रशासन से जुड़ा हुआ अधिकारी था और धीरे-धीरे पंजाब में अपनी राजनीतिक एवं प्रशासनिक शक्ति बढ़ाने में सफल हुआ।

1745 ई. का महत्व

प्रतियोगी परीक्षाओं की कई हिमाचली पुस्तकों में 1745 ई. में अदीना बेग से संबंधित घटनाओं का उल्लेख मिलता है। इस दौर में पंजाब तथा पहाड़ी क्षेत्रों की राजनीति में मुगल, अफगान और स्थानीय शक्तियों के बीच लगातार संघर्ष चल रहा था।

अदीना बेग ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए पहाड़ी रियासतों के मामलों में भी हस्तक्षेप किया।

उस समय:

मुगल सत्ता कमजोर → पंजाब में अराजकता → अफगान शक्ति का विस्तार → पहाड़ी राजाओं की स्वतंत्रता की कोशिश

यह क्रम समझना परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

अदीना बेग की भूमिका

अदीना बेग का महत्व मुख्यतः इसलिए था क्योंकि उसने पंजाब में एक शक्तिशाली स्थानीय प्रशासक के रूप में काम किया और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में कभी मुगलों तो कभी अन्य शक्तियों के साथ राजनीतिक समझौते किए।

इस समय पहाड़ी रियासतों को किसी एक केंद्रीय शक्ति का स्थायी नियंत्रण स्वीकार नहीं करना पड़ रहा था।


4. अहमद शाह दुर्रानी (अब्दाली) का उदय

नादिरशाह की मृत्यु 1747 ई. में हुई। इसके बाद उसके सेनापति अहमद खान अब्दाली ने अफगानिस्तान में अपनी शक्ति स्थापित की और अहमद शाह दुर्रानी के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

उसने भारत पर कई बार आक्रमण किए और पंजाब में अपना प्रभाव स्थापित किया।

अहमद शाह दुर्रानी के आक्रमणों का हिमाचल की पहाड़ी रियासतों की राजनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा।

1752 ई. की महत्वपूर्ण घटना

1752 ई. में कमजोर मुगल सत्ता ने पंजाब के बड़े हिस्से पर अहमद शाह दुर्रानी का प्रभाव स्वीकार किया। कांगड़ा की कटोच रियासतें भी नाममात्र रूप से दुर्रानी के अधीन मानी गईं, लेकिन स्थानीय पहाड़ी शासकों ने वास्तविक स्वतंत्रता बनाए रखी।


5. अहमद शाह दुर्रानी और घमंड चंद

इस काल का सबसे महत्वपूर्ण संबंध अहमद शाह दुर्रानी और कांगड़ा के राजा घमंड चंद के बीच था।

राजा घमंड चंद

घमंड चंद कटोच वंश का शक्तिशाली शासक था। उसने मुगल सत्ता के पतन और अफगान प्रभाव के बीच अपनी शक्ति को बढ़ाया।

1758 ई. में अहमद शाह दुर्रानी ने घमंड चंद को जालंधर दोआब का नाज़िम/गवर्नर नियुक्त किया। इसके साथ उसे सतलुज और रावी के बीच के पहाड़ी क्षेत्र में भी प्रभाव प्राप्त हुआ। हिमाचल सरकार और कांगड़ा जिला प्रशासन के आधिकारिक इतिहास में भी इस नियुक्ति का उल्लेख मिलता है।

घमंड चंद की नियुक्ति का महत्व

यह घटना कांगड़ा के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण थी क्योंकि:

  1. घमंड चंद की राजनीतिक शक्ति बढ़ी।
  2. कांगड़ा का प्रभाव मैदानी क्षेत्रों तक पहुंचा।
  3. कटोच शक्ति का पुनरुत्थान शुरू हुआ।
  4. आसपास की पहाड़ी रियासतों पर घमंड चंद का प्रभाव बढ़ा।
  5. कांगड़ा राज्य ने मुगल पतन से उत्पन्न राजनीतिक शून्य का लाभ उठाया।

6. घमंड चंद और कांगड़ा किला

घमंड चंद ने कांगड़ा की पुरानी शक्ति को पुनः स्थापित करने का प्रयास किया।

उस समय कांगड़ा किला अभी भी मुगल नियंत्रण में था और किले में मुगल प्रतिनिधि/गवर्नर का प्रभाव था। इसलिए घमंड चंद अपनी राजनीतिक शक्ति बढ़ाने के बावजूद कांगड़ा किले पर तत्काल अधिकार नहीं कर सका।

कांगड़ा जिला प्रशासन के अनुसार, घमंड चंद कांगड़ा किले पर अधिकार नहीं कर सका और उसने ब्यास नदी के बाएं किनारे तिरा सुजानपुर में एक किला बनवाया।

परीक्षा तथ्य

घमंड चंद — कांगड़ा किला नहीं जीत सके।

लेकिन उन्होंने कांगड़ा क्षेत्र और आसपास के पहाड़ी राज्यों में अपनी शक्ति काफी बढ़ा ली।


7. घमंड चंद की उपलब्धियाँ

घमंड चंद को कांगड़ा की शक्ति के पुनरुत्थान का महत्वपूर्ण शासक माना जाता है।

उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ:

  • कांगड़ा की राजनीतिक प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित किया।
  • जालंधर दोआब के नाज़िम बने।
  • सतलुज से रावी के बीच के पहाड़ी क्षेत्र में प्रभाव स्थापित किया।
  • आसपास की छोटी पहाड़ी रियासतों पर प्रभाव बढ़ाया।
  • कांगड़ा के कटोच वंश की राजनीतिक शक्ति को मजबूत किया।
  • मुगल सत्ता के कमजोर होने का लाभ उठाया।

कांगड़ा जिला प्रशासन के अनुसार, 1758 में घमंड चंद को जालंधर दोआब और सतलुज-रावी के बीच के पहाड़ी देश का गवर्नर बनाया गया था।


8. घमंड चंद की मृत्यु

घमंड चंद की मृत्यु 1774 ई. में हुई।

उनके बाद उनके पुत्र तेघ चंद उत्तराधिकारी बने, लेकिन वे लंबे समय तक शासन नहीं कर सके। इसके बाद कटोच वंश में आगे चलकर संसार चंद का उदय हुआ।

कांगड़ा जिला प्रशासन के आधिकारिक इतिहास में भी घमंड चंद की मृत्यु 1774 ई. में बताई गई है।


9. 1774–1783 ई. : कांगड़ा में परिवर्तन

1774 ई. के बाद कांगड़ा की राजनीति में एक नया चरण शुरू हुआ।

कांगड़ा किला अभी भी मुस्लिम शासन/मुगल प्रतिनिधि के नियंत्रण में था। इसी दौरान सिख शक्ति का प्रभाव बढ़ रहा था।

1783 ई. कांगड़ा किले पर नियंत्रण में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ। यह घटना आगे चलकर संसार चंद के उदय का रास्ता तैयार करने वाली बनी।

कांगड़ा के इतिहास के अनुसार, 1783 के आसपास कांगड़ा किले से मुस्लिम शासन का अंत हुआ और बाद में संसार चंद ने कांगड़ा पर अपना अधिकार स्थापित किया।


प्रतियोगी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तिथियाँ

वर्षघटना
1707 ई.औरंगजेब की मृत्यु; मुगल साम्राज्य का पतन तेज
1739 ई.नादिरशाह का भारत पर आक्रमण
1745 ई.अदीना बेग से संबंधित पंजाब की राजनीतिक घटनाएँ
1747 ई.नादिरशाह की मृत्यु; अहमद शाह दुर्रानी का उदय
1752 ई.पंजाब पर अहमद शाह दुर्रानी का प्रभाव स्थापित
1758 ई.घमंड चंद को जालंधर दोआब का नाज़िम/गवर्नर नियुक्त किया गया
1761 ई.तीसरा पानीपत युद्ध; अहमद शाह दुर्रानी की विजय
1774 ई.घमंड चंद की मृत्यु
1783 ई.कांगड़ा किले पर मुस्लिम नियंत्रण का अंत; आगे संसार चंद के उदय का मार्ग

परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य

1. औरंगजेब की मृत्यु कब हुई?

उत्तर — 1707 ई.

2. नादिरशाह ने भारत पर कब आक्रमण किया?

उत्तर — 1739 ई.

3. नादिरशाह की मृत्यु कब हुई?

उत्तर — 1747 ई.

4. नादिरशाह के बाद भारत में अफगान शक्ति का प्रमुख शासक कौन बना?

उत्तर — अहमद शाह दुर्रानी।

5. अहमद शाह दुर्रानी को अन्य किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर — अहमद शाह अब्दाली।

6. 1752 ई. में पंजाब पर किसका प्रभाव स्थापित हुआ?

उत्तर — अहमद शाह दुर्रानी।

7. राजा घमंड चंद किस वंश से संबंधित था?

उत्तर — कटोच वंश।

8. घमंड चंद को जालंधर दोआब का नाज़िम कब बनाया गया?

उत्तर — 1758 ई.

9. घमंड चंद को किसने जालंधर दोआब का नाज़िम बनाया?

उत्तर — अहमद शाह दुर्रानी।

10. घमंड चंद कांगड़ा किले पर अधिकार क्यों नहीं कर सके?

उत्तर — कांगड़ा किला उस समय मुगल नियंत्रण में था और वहाँ मजबूत मुस्लिम गारद/प्रशासन था।

11. घमंड चंद ने कौन-सा किला बनवाया?

उत्तर — तिरा सुजानपुर का किला।

12. घमंड चंद की मृत्यु कब हुई?

उत्तर — 1774 ई.

13. घमंड चंद के बाद कौन शासक बना?

उत्तर — उसका पुत्र तेघ चंद।

14. कांगड़ा की शक्ति के पुनरुत्थान में घमंड चंद का क्या योगदान था?

उत्तर — उन्होंने कटोच शक्ति को पुनर्जीवित किया और कांगड़ा के राजनीतिक प्रभाव को फिर से मजबूत किया।

15. कांगड़ा पर मुस्लिम नियंत्रण का अंत किस वर्ष माना जाता है?

उत्तर — 1783 ई.


निष्कर्ष

उत्तर मुगल काल (1707–1783 ई.) हिमाचल प्रदेश के मध्यकालीन इतिहास का संक्रमणकाल था। 1707 ई. में औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल शक्ति कमजोर हुई और पहाड़ी रियासतों ने अपनी स्वतंत्रता मजबूत करने का प्रयास किया। 1739 ई. का नादिरशाह का आक्रमण, उसके बाद अहमद शाह दुर्रानी का उदय, पंजाब में अदीना बेग की राजनीतिक भूमिका तथा घमंड चंद का उत्थान इस काल की प्रमुख घटनाएँ थीं।

विशेष रूप से 1758 ई. में अहमद शाह दुर्रानी द्वारा घमंड चंद को जालंधर दोआब का नाज़िम नियुक्त करना कांगड़ा के राजनीतिक पुनरुत्थान की महत्वपूर्ण घटना थी।

इसी राजनीतिक प्रक्रिया ने आगे चलकर संसार चंद के उदय और कांगड़ा की पुनः प्रतिष्ठा की नींव रखी। इसलिए प्रतियोगी परीक्षा में इस पूरे काल को इस क्रम में याद करना सबसे उपयोगी है:

1707 — औरंगजेब की मृत्यु → 1739 — नादिरशाह → 1747 — अहमद शाह दुर्रानी → 1752 — पंजाब पर दुर्रानी प्रभाव → 1758 — घमंड चंद का उत्थान → 1774 — घमंड चंद की मृत्यु → 1783 — कांगड़ा में मुस्लिम नियंत्रण का अंत।



Rakesh Kumar

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