बिलासपुर जिले के लोक नृत्य और लोक गीत | Bilaspur Himachal GK

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के लोक नृत्य और लोक गीत

हिमाचल प्रदेश का बिलासपुर जिला अपनी समृद्ध लोक-संस्कृति, कहलूरी परंपराओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों, लोकगाथाओं और लोकनाट्यों के लिए जाना जाता है। बिलासपुर की लोक-संस्कृति में विवाह एवं अन्य संस्कारों से जुड़े गीतों के साथ-साथ प्रेम, वीरता, धार्मिक आस्था और लोकजीवन से जुड़े गीतों की भी महत्वपूर्ण परंपरा रही है।

हिमाचल प्रदेश के भाषा एवं संस्कृति विभाग ने भी बिलासपुर की संस्कृति और संस्कार गीतों पर अलग प्रकाशन सूचीबद्ध किया है। वर्तमान में भी बिलासपुर में लोकगीत, संस्कार गीत और लोकनृत्य से संबंधित सांस्कृतिक कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं।

1. बिलासपुर जिले के प्रमुख लोक नृत्य

1. बिलासपुरी गिद्धा

बिलासपुरी गिद्धा बिलासपुर की प्रमुख महिला लोकनृत्य परंपराओं में से एक है। हिमाचल प्रदेश के भाषा एवं संस्कृति विभाग के अनुसार गिद्धा (पडुआं) बिलासपुर सहित सोलन, कांगड़ा, ऊना, मंडी और हमीरपुर के कई क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा विवाह तथा अन्य मांगलिक अवसरों पर किया जाता है। हिमाचल का यह गिद्धा पंजाब के गिद्धे से अलग स्वरूप रखता है।

बिलासपुर के विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों में भी बिलासपुरी गिद्धा की प्रस्तुतियां होती रही हैं। कहलूर लोक उत्सव में बिलासपुर की विभिन्न महिला मंडलियों द्वारा गिद्धा और संस्कार गीत प्रस्तुत किए जाते हैं।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण:
बिलासपुरी गिद्धा — बिलासपुर की प्रमुख लोकनृत्य परंपरा।

2. झमाकड़ा

झमाकड़ा हिमाचल प्रदेश के निचले क्षेत्रों का प्रसिद्ध लोकनृत्य है। भाषा एवं संस्कृति विभाग के अनुसार इसका प्रचलन कांगड़ा, हमीरपुर और बिलासपुर जैसे क्षेत्रों में है।

यह मुख्य रूप से विवाह के अवसर से जुड़ा हुआ है। जब बारात वधू के घर पहुंचती है, तब महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीत, सिठनियां और हास्य-विनोद के साथ झमाकड़ा प्रस्तुत करती हैं। इसमें ढोलक, बांसुरी और खंजरी जैसे लोक वाद्यों का प्रयोग किया जाता है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण:
झमाकड़ा — कांगड़ा, हमीरपुर और बिलासपुर के निचले क्षेत्रों में प्रचलित लोकनृत्य।

3. अन्य पारंपरिक लोक प्रस्तुतियां

बिलासपुर में लोकनृत्य के साथ लोकनाट्य और लोकगाथाओं की भी समृद्ध परंपरा है। स्थानीय सांस्कृतिक आयोजनों में गिद्धा, लोकगीत, संस्कार गीत, गुग्गा गाथा और धाजा जैसी प्रस्तुतियां देखने को मिलती हैं। 2026 के कहलूर लोक उत्सव की जानकारी में भी बिलासपुर के सांस्कृतिक दलों द्वारा लोकनृत्य, संस्कार गीत, लोकगीत, लोककथा, लोकनाटक, धाजा और गुग्गा गाथा की प्रस्तुतियों का उल्लेख है।


2. बिलासपुर जिले के प्रमुख लोक गीत

बिलासपुर के लोकगीतों में स्थानीय जीवन, प्रेम, सामाजिक संबंध, वीरता, धार्मिक आस्था तथा संस्कारों की झलक मिलती है। बिलासपुर के लोकगीतों पर प्रकाशित सामग्री में कई पारंपरिक गीतों का उल्लेख मिलता है।

1. गम्भरी

गम्भरी बिलासपुर से संबंधित प्रसिद्ध लोकगीतों में गिना जाता है। उपलब्ध सांस्कृतिक सामग्री में इसे बिलासपुर के प्रसिद्ध लोकगीतों में शामिल किया गया है।

गम्भरी से जुड़ी लोकपरंपरा बिलासपुर के लोकजीवन और स्थानीय सांस्कृतिक स्मृति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

2. बंतो

बंतो भी बिलासपुर के प्रसिद्ध लोकगीतों में उल्लेखित है। इसे बिलासपुर की लोकगीत परंपरा से संबंधित महत्वपूर्ण गीतों में रखा जाता है।

3. बालो

बालो बिलासपुर के प्रसिद्ध लोकगीतों में शामिल है। उपलब्ध स्रोत इसे युवक-युवतियों के बीच गाए जाने वाले युगल गीतों की परंपरा से जोड़ते हैं।

4. झंज्युटी

झंज्युटी भी बिलासपुर के प्रमुख लोकगीतों में उल्लेखित है। इसे भी युगल गीत की परंपरा से संबंधित बताया गया है।

युगल गीतों के रूप में

बिलासपुर के गम्भरी, बालो और झंज्युटी जैसे गीतों का उल्लेख युवक-युवतियों के बीच गाए जाने वाले युगल गीतों के रूप में मिलता है।


5. मोहणा गीत

मोहणा बिलासपुर की लोकगीत परंपरा से संबंधित एक महत्वपूर्ण गीत है। हाल में प्रकाशित लोकगीतों में जनजीवन पुस्तक के विवरण में भी मोहना गीत को बिलासपुर की लोक-सांस्कृतिक सामग्री में शामिल बताया गया है।


6. झेड़ा लोकगीत

झेड़ा बिलासपुर, कांगड़ा और मंडी से संबंधित महत्वपूर्ण लोकगीत परंपरा है। इसे वीर पुरुषों की गाथा से जुड़े गीतों के रूप में उल्लेखित किया जाता है।

इसमें लोकनायकों और वीर पुरुषों की गाथाओं का गायन किया जाता है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण:
झेड़ा — बिलासपुर, कांगड़ा और मंडी से संबंधित वीरगाथात्मक लोकगीत।


7. संस्कार गीत

बिलासपुर की लोक-संस्कृति में संस्कार गीतों का विशेष महत्व है। जन्म, विवाह तथा अन्य सामाजिक संस्कारों के अवसर पर पारंपरिक गीत गाने की परंपरा रही है।

भाषा एवं संस्कृति विभाग ने “बिलासपुर की संस्कृति एवं संस्कार गीत” नाम से प्रकाशन भी सूचीबद्ध किया है।

बिलासपुर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यशालाओं में भी लोकगीत और संस्कार गीतों को लोक-संस्कृति के महत्वपूर्ण अंग के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।


8. पिंगा दे गीत

हिमाचल की लोकगीत परंपरा में झूले से जुड़े गीतों को पिंगा दे गीत कहा जाता है और इन्हें बिलासपुर से भी जोड़ा जाता है। ये गीत विशेष रूप से झूले और सावन की लोकपरंपरा से संबंधित माने जाते हैं।


बिलासपुर की लोकगाथा और लोकनाट्य परंपरा

1. गुग्गा गाथा

गुग्गा गाथा बिलासपुर की लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। बिलासपुर के सांस्कृतिक आयोजनों में गुग्गा गाथा की प्रस्तुतियां होती रही हैं।

2. धाजा लोकनाट्य

धाजा बिलासपुर की प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनाट्य परंपरा है। बिलासपुर के कहलूर क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा में इसका विशेष उल्लेख मिलता है। भाषा एवं संस्कृति विभाग के अनुसार बिलासपुर में लोकनाट्य परंपराओं का महत्वपूर्ण स्थान है।

बिलासपुर के सांस्कृतिक दलों की सूची में भी धाजा से संबंधित कई दलों का उल्लेख मिलता है।

3. भगत लोकनाट्य

भगत लोकनाट्य का प्रचलन विशेष रूप से कांगड़ा, हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर में बताया गया है। इसमें कृष्ण की लीलाओं तथा हास्य-विनोद से जुड़ी प्रस्तुतियां की जाती हैं।


बिलासपुर की लोक-संस्कृति में प्रमुख लोकगीत और नृत्य — एक नज़र में

लोक कलाबिलासपुर से संबंध
बिलासपुरी गिद्धाप्रमुख लोकनृत्य
झमाकड़ानिचले हिमाचली क्षेत्रों का लोकनृत्य
गम्भरीप्रमुख लोकगीत
बंतोलोकगीत
बालोयुगल लोकगीत
झंज्युटीयुगल लोकगीत
मोहणालोकगीत
झेड़ावीरगाथात्मक लोकगीत
संस्कार गीतजन्म-विवाह आदि अवसरों से जुड़े गीत
गुग्गा गाथालोकगाथा
धाजालोकनाट्य परंपरा
भगतलोकनाट्य

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. बिलासपुर जिले का प्रमुख महिला लोकनृत्य कौन-सा है?
उत्तर: बिलासपुरी गिद्धा।

प्रश्न 2. गिद्धा (पडुआं) हिमाचल प्रदेश के किन क्षेत्रों में प्रचलित है?
उत्तर: बिलासपुर सहित सोलन, कांगड़ा, ऊना, मंडी और हमीरपुर के कई क्षेत्रों में।

प्रश्न 3. बिलासपुर, कांगड़ा और हमीरपुर में प्रचलित प्रमुख लोकनृत्य कौन-सा है?
उत्तर: झमाकड़ा।

प्रश्न 4. बिलासपुर के प्रसिद्ध लोकगीतों में किनका नाम लिया जाता है?
उत्तर: गम्भरी, बंतो, बालो और झंज्युटी आदि।

प्रश्न 5. बिलासपुर से संबंधित प्रमुख वीरगाथात्मक लोकगीत कौन-सा है?
उत्तर: झेड़ा।

प्रश्न 6. झेड़ा लोकगीत किन जिलों से संबंधित है?
उत्तर: बिलासपुर, कांगड़ा और मंडी।

प्रश्न 7. बिलासपुर की प्रमुख लोकनाट्य परंपरा कौन-सी है?
उत्तर: धाजा।

प्रश्न 8. बिलासपुर में कौन-सी लोकगाथा प्रस्तुत की जाती है?
उत्तर: गुग्गा गाथा।

प्रश्न 9. बिलासपुर की लोक-संस्कृति में किस प्रकार के गीतों का विशेष महत्व है?
उत्तर: संस्कार गीतों का।

प्रश्न 10. बिलासपुर के लोकगीतों में युवक-युवतियों के युगल गीतों के उदाहरण कौन-कौन से हैं?
उत्तर: गम्भरी, बालो और झंजुटी।


निष्कर्ष

बिलासपुर जिले की लोक-संस्कृति में बिलासपुरी गिद्धा और झमाकड़ा जैसे लोकनृत्य, तथा गम्भरी, बंतो, बालो, झंज्युटी, मोहणा और झेड़ा जैसे लोकगीत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इसके साथ ही संस्कार गीत, गुग्गा गाथा और धाजा लोकनाट्य बिलासपुर की सांस्कृतिक पहचान को और समृद्ध बनाते हैं।

बिलासपुर की लोक परंपरा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विवाह-संस्कार, लोकआस्था, वीरगाथा, सामाजिक जीवन और स्थानीय परंपराओं की झलक भी मिलती है। आज भी जिले में लोकगीत, संस्कार गीत और लोकनृत्य से संबंधित सांस्कृतिक कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं।

 

Rakesh Kumar

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