HP Fairs and festivals in Hindi:

हिमाचल प्रदेश के मेले और त्यौहार:
1. चंबा जिले के मेले और त्यौहार
1. फूल यात्रा मेला
फूल यात्रा हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के पांगी क्षेत्र में आयोजित होने वाला एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय मेला है। यह मेला प्रत्येक वर्ष अक्टूबर महीने में मनाया जाता है और पांगी घाटी की अनूठी लोक संस्कृति एवं प्राकृतिक सौंदर्य को प्रदर्शित करता है।
इस मेले की सबसे खास विशेषता फूलों की सजावट और प्रदर्शनी है। पांगी क्षेत्र के लोग विभिन्न प्रकार के सुंदर फूलों को एकत्र करते हैं और उन्हें पारंपरिक ढंग से सजाकर मेले में प्रस्तुत करते हैं। स्थानीय लोग फूलों को अपने सिर पर सजाकर भी इस उत्सव में भाग लेते हैं।
फूल यात्रा के माध्यम से स्थानीय लोग प्रकृति के प्रति अपने प्रेम और सम्मान को व्यक्त करते हैं। इस दौरान पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत और लोकनृत्य भी देखने को मिलते हैं। दुर्गम पांगी घाटी की अपनी विशिष्ट संस्कृति और परंपराओं को समझने के लिए यह मेला विशेष महत्व रखता है।
इस प्रकार फूल यात्रा पांगी क्षेत्र की लोक संस्कृति, प्रकृति और सामुदायिक परंपराओं का अनोखा उत्सव है।
2 . सुई मेला (Sui Mela)
सुई मेला हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले का एक प्रसिद्ध जिला स्तरीय मेला है। यह मेला प्रत्येक वर्ष अप्रैल महीने में चंबा नगर में आयोजित किया जाता है। यह मेला चंबा की ऐतिहासिक और लोक परंपराओं से जुड़ा हुआ है तथा इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसमें महिलाओं और बच्चों की प्रमुख भागीदारी है।
सुई मेले को चंबा की रानी सुही के बलिदान की स्मृति से जोड़ा जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार चंबा नगर में पानी की समस्या को दूर करने के लिए रानी सुही ने अपना बलिदान दिया था। उनके बलिदान की स्मृति में आज भी यह परंपरा श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।
मेले के दौरान महिलाएँ और बच्चे विशेष रूप से इसमें भाग लेते हैं। पारंपरिक गीत, नृत्य और धार्मिक अनुष्ठान इस आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। चंबा की महिलाओं की पारंपरिक भूमिका और स्थानीय संस्कृति को समझने में यह मेला विशेष महत्व रखता है।
सुई मेले की एक खास बात यह भी है कि इसमें रानी सुही के त्याग और बलिदान की कहानी को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य होता है। इसलिए यह केवल मनोरंजन का मेला नहीं, बल्कि चंबा की ऐतिहासिक स्मृति, नारी त्याग और लोक आस्था का प्रतीक भी है।
3. भरमौर यात्रा
4. छतराड़ी यात्रा
5. मणिमहेश यात्रा
8. सारही मेला (Sarahi Mela)
सारही मेला हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के अर्की में आयोजित होने वाला एक प्रसिद्ध मेला है। यह सोलन जिले के प्रमुख राज्य स्तरीय मेलों में शामिल है। यह मेला हर वर्ष जुलाई महीने में आयोजित किया जाता है और स्थानीय संस्कृति तथा पारंपरिक मनोरंजन के लिए विशेष पहचान रखता है।
सारही मेले का सबसे प्रमुख आकर्षण बैल लड़ाई है। इस अवसर पर आसपास के गाँवों के लोग अपने बैलों को लेकर मेले में पहुँचते हैं। मैदान में बैलों के बीच मुकाबला कराया जाता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और दर्शक एकत्र होते हैं। यह आयोजन हिमाचल प्रदेश की पुरानी ग्रामीण परंपराओं और पशुपालन से जुड़े जीवन की झलक प्रस्तुत करता है।
मेले के दौरान स्थानीय लोगों में उत्साह और उमंग का वातावरण रहता है। विभिन्न प्रकार की दुकानें, स्थानीय उत्पाद, खान-पान तथा मनोरंजन के कार्यक्रम भी मेले की रौनक बढ़ाते हैं। इस प्रकार सारही मेला अर्की क्षेत्र की ग्रामीण संस्कृति और पारंपरिक मेलों की पहचान को जीवित रखने वाला महत्वपूर्ण आयोजन है।
9. शूलिनी मेला (Shoolini Mela)
शूलिनी मेला हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले का एक प्रसिद्ध राज्य स्तरीय मेला है। यह मेला प्रत्येक वर्ष जून महीने में सोलन नगर में आयोजित किया जाता है। यह मेला सोलन की धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सामाजिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
शूलिनी मेले का नाम माता शूलिनी देवी के नाम पर पड़ा है, जिन्हें सोलन की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मेले के दौरान माता शूलिनी देवी की शोभायात्रा निकाली जाती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं।
कई दिनों तक चलने वाले इस मेले में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य, लोकगीत, खेल प्रतियोगिताएँ और विभिन्न प्रकार की प्रदर्शनियाँ आयोजित की जाती हैं। मेले में स्थानीय व्यापारी और दुकानदार भी भाग लेते हैं, जिससे यह धार्मिक आयोजन होने के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र भी बन जाता है।
शूलिनी मेला सोलन की धार्मिक आस्था और हिमाचली लोक संस्कृति का सुंदर संगम है।
यह मेला हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में मनाया जाता है। यह सिरमौर जिले का राज्य स्तर का मेला है। यह मेला माता बाला सुंदरी को समर्पित है। सिरमौर जिले में यह मेला त्रिलोकपुर नामक पवित्र स्थान में मनाया जाता है। यह मेला हर साल नवरात्रों वाले दिन मनाया जाता है।
11 : रेणुका मेला (Renuka Mela )
यह मेला भी सिरमौर जिले का राज्य स्तर का मेला है। यह मेला रेणुका झील के किनारे मनाया जाता है। यह हर साल मेला नवंबर महीने में मनाया जाता है।
12 : पावन द्वादसी मेला
यह मेला हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले का जिला स्तर का मेला है। सिरमौर में यह मेला सुरहा नामक स्थान पर मनाया जाता है। यह मेला हर साल सितम्बर महीने में मनाया जाता है। इस मेले में सिरमौर के लोग हर्षोउल्लास से हिस्सा लेते है।
13 : पिपलू मेला (Piplu Mela )
हिमाचल प्रदेश में यह मेला ऊना जिले में मनाया जाता है। यह ऊना जिले का जिले स्तर का मेला है। यह मेला पिपलू नामक स्थान पर मनाया जाता है। यह मेला साल के मई जून में मनाया जाता है। माना जाता है की यहां के लोग यहां के पीपल के वृक्ष की पूजा करते है जिसके पीछे एक पुराना इतिहास है .
14 : चिंतपूर्णी मेला :
यह मेला हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में मनाया जाता है। यह मेला ऊना जिले का ये भी राज्य स्तर का मेला है। यह मेला माँ चिंतपूर्णी को समर्पित है। इस मेले मैं माँ चिंतपूर्णी की पूजा बड़ी ही धूमधाम से की जाती है। हिन्दू धर्म के अनुसार माँ चिंतपूर्णी को चिंता को हरने वाली मन जाता है। यह मेला अक्टूबर में हर साल लगता है।
15 : बाबा बड़भाग सिंह मेला (बाबा Vadbhag Singh Fair )
हिमाचल प्रदेश में यह मेला ऊना जिले में मनाया जाता है। यह मेला भी ऊना जिले का राज्य स्तरीय मेला है। ये मेला हर साल जून महीने में मनाया जाता है। ये मेला हिन्दू न केवल हिन्दू धर्म बल्कि सिख धर्म के लिए भी बहुत मान्य मन जाता है। कहीं न कहीं बाबा बड़भाग सिंह का मेला हिन्दू और सिख धर्म धार्मिक आस्था के साथ जुड़ा हुआ है।
16 : नलवाड़ी मेला (Nalwadi Fair )
17 : नैना देवी मंदिर मेला (Naina Devi Fair )
यह मेला भी बिलासपुर जिए में मनाया जाता है। यह मेला बिलासपुर जिले का राज्य स्तरीय मेला है। यह मेला हर साल अगस्त ही महीने में मनाया जाता है। यह मेला बिलसपुर जिले के नैना देवी मंदिर में हर साल आयोजित किया जाता है। और यहां के लोग माता नैना देवी की पूजा बड़ी ही धूमधाम से करते है।
18 : गुग्गा मेला (Guga Fair )
यह मेला भी बिलासपुर जिले का राज्य स्तरीय मेला है। बिलासपुर जिले में यह विहृरु मेला नामक स्थान पर मनाया जाता है।यह मेला अगस्त के अंत में शुरू होता है या सितंबर के शुरुआत शुरुआत में मनाया जाता है।
19 : मारकंडा मेला (Markanda Fair )
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले का यह मेला हर साल अप्रैल में मनाया जाता है। यह मेला बिलासपुर जिले के जुखाला नामक स्थान पर मनाया जाता है। यह माना जाता है की यह मेला ऋषि मार्कंड़य को समर्पित है।
20 : ढुंगरी मेला (Dhungri Fair)
यह मेला हिमाचल प्रदेश के ज़िला कुल्लू के मनाली में मनाया जाता है मनाली एक मशहूर सैलानी स्थल भी है। यह कुल्लू किले में मेला गर्मियों में मई महीने में मनाया जाता है। यह माना जाता है यह मेला महाभारत काल के माँ हिडिम्बा को समर्पित है।
21:.बूढी दीवाली
22 : भुण्डा उत्सव (Bhunda Utsav )
यह मेला भी हिमाचल प्रदेश के कुल्लू ज़िले में ही में मनाया जाता है। यह मेला कुल्लू जिले के निरमंड में ही में मनाया जाता है इस मेले की विशेषता ये है की यह मेला भी कुंभ मेले के साथ ये मिलती है की ये भी कुंभ मेले की भांति हर 12 साल बाद मनाया जाता है। भुण्डा मेले का संबंध भगवान परशुराम से माना जाता है।
23 : कुल्लू का दशहरा (Dussehra )
यह मेला कुल्लू जिले का एक राष्ट्रीय स्तर का मेला है इस मेले की यह विशेषता कि यह लगातार 7 दिन तक चलता है। इस मेले की शुरुआत 1651 ई में वहां के राजा जगत सिंह द्वारा की गई। कुल्लू का दशहरा मशहूर मैदान ढालपुर में मनाया जाता है।
24 : पुरग मेला (Purag Mela )
यह मेला हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में मनाया जाता है। यह मेला शिमला जिले के कोटखाई इलाके में मनाया जाता है। यह मेला हर साल अप्रैल महीने में मनाया जाता है। यह मेला भोले शंकर महादेव को समर्पित है।
25 : फ़ाग मेला (Fag Mela )
यह मेला भी हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में मनाया जाता है। यह मेला भी शिमला जिले का एक ज़िला स्तर का मेला है। यह मेला रामपुर नामक स्थान पर मनाया जाता है। यह मेला हर साल फागुन महीने में मनाया जाता है।
26 : भैंसो का मेला (fair of Buffaloes )
27 : पत्थर का मेला
यह मेला शिमला जिले में मनाया जाता है। यह मेला शिमला जिले के मशोबरा नामक मशहूर स्थान पर मनाया जाता है। यह मेला हर साल सितम्बर महीने में मनाया जाता है। इसे पत्थर का मेला इसलिए कहा जाता है .
28 : रोहड़ू मेला (Rohru Mela )
यह मेला मेला भी हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में मनाया जाता है। यह मेला शिमला जिले के रोहड़ू में मनाया जाता है।यह मेला हिमाचल के मेलों में से राज्य स्तर का मेला है। यह मेला हर साल अप्रैल महीने में मनाया जाता है। इस मेले में रोहड़ू के culture की एक बहुत बढ़िया झलक देखने को मिलती है। .
29 : ग्रीष्मोत्स्व मेला
यह मेला शिमला जिले के साथ सिरमौर में भी मनाया जाता है पर शिमला में यह बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह मेला शिमला जिले का राष्ट्रीय स्तर का मेला है। इस मेले की शुरूआत हर साल मई महीनें होती है ये शिमला मैं बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। यह मेला ग्रीष्म ऋतू में मनाया जाता है इसलिए इसे ग्रीष्मोत्सव मेले का नाम दिया गया है।
30 : महासू नाग मेला (Mhasu Nag Mela )
यह मेला मंडी जिले में मनाया जाता है। यह मेला ज़िला मंडी का ज़िला स्तर का मेला है। मंडी जिले में यह मेला करसोग नामक स्थान पर मनाया जाता है। यह मेला हर साल के मई महीने में मनाया जाता है।
31 :.सैचू मेला (Saichu Mela )
यह मेला मंडी जिले का राज्य स्तरीय मेला है। यह मेला मंडी जिले के रिवालसर झील के किनारे में मनाया जाता है। हर साल 13 अप्रैल को इस मेले को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह मेला सभी धर्म हिन्दू, सिख,और बौद्ध धर्म के लिए महत्वपूर्ण है आस्था का प्रतीक है और बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
32 : मंडी का शिवरात्रि मेला (Shivratri Fair of Mandi District )
हिमाचल प्रदेश के सभी मेलों में मंडी जिले का शिवरात्रि का मेला पुरे भारत में प्रसिद्ध है। यह मेला मंडी जिले का ये मेला राष्ट्रीय स्तर का है। यह त्यौहार मंडी जिले में शिवरात्रि वाले दिन मनाया जाता है और बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। मंडी जले का यह मेला बहुत मेला पुराना और हिमाचल के मेलों में अपनी छवि के लिए जाना जाता है । मंडी में यह मेला मंडी जिले के पड्डल मैदान में मनाया जाता है। इसे मंडी के राजा अकबर सेन ने 1527 ई में शुरू करवाया था।
33: . दियोट सिद्ध मेला (Deot Sidh Mela )
हिमाचल प्रदेश में यह मेला हमीरपुर जिले में ही मनाया जाता है। इस मेले का आयोजन हर साल मार्च अप्रैल में होता है।
34 : गसोता मेला (Gasota Mela )
यह मेला हमीरपुर जिले में हर साल अप्रैल महीने में मनाया जाता है।
35 : हमीर उत्सव (Hamir Utsav )
हमीर उत्सव हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में मनाया जाता है। यह मेला हर साल सितम्बर महीने में मनाया जाता है। यह मेला Sujan पुर तिहरा में मनाया जाता है जी की स्थापना राजा संसार चंद ने की थी।
36 : हमीरपुर का होली मेला (Holi का त्यौहार )
हमीरपुर का होली का त्योहार पुरे भारत में प्रसिद्ध है हम सभी जानते हैं की होली रंगों का त्योहार माना जाता है। यह मेला हर साल मार्च में मनाया जाता है। पर हिमाचल प्रदेश में इसका अपना स्थान है।
37: डल मेला (Dal Mela)
हिमाचल प्रदेश में यह मेला काँगड़ा जिले में मनाया जाता है। इस मेले का आयोजन हर साल अगस्त में होता है।
38 : ज्वालामुखी मेला (Jwalamukhi Mela)
हिमाचल प्रदेश में यह मेला काँगड़ा जिले में हर साल नवरात्रों के दिन में जवालामुखी मंदिर में लगता है।
39 : कालेश्वर मेला (Kaleshwar Fair )
यह मेला भी काँगड़ा जिले में लगता है और हर साल अप्रैल महीने के वैशाखी वाले दिन लगता है। यह एक राज्य स्तरीय मेला है।
40 : फुलेच उत्स्व (Fultech Utsav )
यह मेला हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में मनाया जाता है। इसके नाम से ही पता चलता है की फुलेच का अर्थ होता है फूल और इसलिए इसे फुलैच मेला कहा जाता है। यह हर साल सितम्बर में मनाया जाता है।
41: गोची मेला (Gochi Mela )
यह मेला हिमाचल के कलाँग नामक स्थान में मनाया जाता है। यह लाहौल स्पीति जिले का एक जिला स्तर का मेला है। केलांग लाहौल स्पीति में है। इसे हर वर्ष फरवरी महीने में मनाया जाता है।
42: हालवा मेला (Halda Mela )
यह मेला हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति जिले दो घाटियों में चंद्र और भागा में मनाया जाता है। यह मेला दिसंबर जनवरी मैं हर साल मनाया जाता है। इस मेले को वहां के लोगों द्वारा दिवाली के पर्व की तरह मनाया जाता है।
हिमाचल प्रदेश में यह मेला दोनों जिलों ज़िला किन्नौर और लाहौल स्पीति में मनाया जाता है। यह एक का राज्य स्तरीय मेला है। इसका संबंध तिब्बत के नव वर्ष से है इसलिए यह मेला जनवरी के अंतिम सप्ताह में मनाया जाता है।
यह मेला हिमाचल प्रदेश के ल्होल स्पीति के काजा नामक स्थान पर मनाया जाता है। यह मेला लोगों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था से जुड़ा हुआ है।.यह मेला वहां के लोगो द्वारा जुलाई महीने में हरसाल बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
हिमाचल के प्रमुख मेलों-त्योहारों का महीना-वार कैलेंडर और सूची
| महीना | प्रमुख मेले/त्योहार | स्थान |
|---|---|---|
| जनवरी | लोहड़ी, मनाली विंटर कार्निवल | विभिन्न क्षेत्र, मनाली |
| फरवरी | मंडी शिवरात्रि, बैजनाथ शिवरात्रि | मंडी, बैजनाथ |
| मार्च | नलवाड़ी, होली, नवरात्रि | बिलासपुर, सुजानपुर, शक्तिपीठ |
| अप्रैल | बैसाखी, सुही मेला, देवसिद्ध मेला | विभिन्न क्षेत्र |
| मई | कुल्लू स्प्रिंग फेस्टिवल, धुंगरी मेला | कुल्लू, मनाली |
| जून | शिमला समर फेस्टिवल | शिमला |
| जुलाई | मिंजर मेला | चंबा |
| अगस्त | मिंजर, मणिमहेश यात्रा, श्रावण मेला | चंबा, बिलासपुर |
| सितंबर | फुलैच, मणिमहेश यात्रा | किन्नौर, चंबा |
| अक्टूबर | कुल्लू दशहरा | कुल्लू |
| नवंबर | लवी मेला, रेणुका मेला | रामपुर, सिरमौर |
| दिसंबर | क्रिसमस व शीतकालीन स्थानीय उत्सव | शिमला, मनाली व अन्य क्षेत्र |
निष्कर्ष : हिमाचल प्रदेश के मेले और त्योहार यहां की देव संस्कृति, धार्मिक आस्था, लोक परंपराओं और सामाजिक जीवन का जीवंत प्रतिबिंब हैं। कुल्लू दशहरा में सैकड़ों देवी-देवताओं का एकत्र होना, मंडी शिवरात्रि में देव संस्कृति की भव्य झलक, चंबा के मिंजर मेले की ऐतिहासिक परंपरा और रेणुका जी मेले की धार्मिक मान्यताएं हिमाचल की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं।
ये मेले केवल धार्मिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि लोकगीत, नृत्य, पारंपरिक कला, स्थानीय व्यापार और सामुदायिक मेल-जोल को भी बढ़ावा देते हैं। इसलिए हिमाचल प्रदेश के मेले और त्योहार राज्य की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत और पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।