उत्तर प्रदेश केवल भारत के राजनीतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक नहीं है, बल्कि यह हिंदी साहित्य, उर्दू साहित्य और भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा का भी प्रमुख केंद्र रहा है। उत्तर प्रदेश की धरती ने ऐसे अनेक कवियों, लेखकों और साहित्यकारों को जन्म दिया या उनके साहित्यिक जीवन को दिशा दी, जिन्होंने भारतीय साहित्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं।
वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, आगरा, कानपुर, मथुरा और अयोध्या जैसे शहर लंबे समय से साहित्यिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र रहे हैं। तुलसीदास, सूरदास, कबीर, भारतेंदु हरिश्चंद्र, प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद और हरिवंश राय बच्चन जैसे प्रसिद्ध साहित्यकारों का संबंध उत्तर प्रदेश की साहित्यिक परंपरा से रहा है।
UP GK की दृष्टि से कवि/लेखक का नाम, जन्मस्थान, प्रमुख रचनाएँ और साहित्यिक क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में इनसे संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
उत्तर प्रदेश के कवि और लेखक और रचनाएं
1. मुंशी प्रेम चंद हिंदी साहित्य के लेखक
मुंशी प्रेम चंद को हिंदी साहित्य के सम्राट भी कहा जाता है। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 में वाराणसी शहर से लगभग 8 KM दूर लमही गांव में हुआ था। उनके साहित्य और कहानियां देश प्रेम और आम जनता के साथ जुडी हुई हैं। उनके पिता मुंशी राय थे। उनका बचपन मुश्किलों से घिरा हुआ है।
8 साल की में उनकी माता जी का निधन हो गया था। उसके बाद उनके पिता जी ने 15 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी पर वे शादी भी टूट गई। उसके बाग़ उन्होंने एक विधवा से शादी की। 13 साल की उम्र में उन्होंने कहानियां लिखनी शुरू कर दीऔर 300 से भी ज्यादा कहानियां प्रकाशित हुई। 8 अक्टूबर 1936 में उनकी मृत्यु हो गई।
मुंशीप्रेम चंद के प्रमुख उपन्यास:
- गोदान
- प्रतिज्ञा
- वरदान सेवा सदन
- प्रेम आश्रम
- निर्मला
- कर्मभूमि
- गबन
- रंग भूमि
- मनोरमा आदि मुख्य है।
प्रमुख कहानियाँ:
- कफन
- पूस की रात
- ईदगाह
- नमक का दरोगा
- पंच परमेश्वर
- बड़े घर की बेटी
प्रेमचंद को “उपन्यास सम्राट” कहा जाता है।
परीक्षा तथ्य: प्रेमचंद का जन्मस्थान लमही, वाराणसी है।
2. जय शंकर प्रसाद
जय शंकर प्रसाद भी उत्तर प्रदेश के Famous उपन्यास कारों में से एक हैं। उनका जन्म 30 जनवरी 1889 में उत्तर पप्रदेश के वाराणसी जिले में हुआ। पहले उनका आरम्भिक जीवन सही था शिक्षा के लिए सभी अध्यापक घर पर आते थे। पर बाद में 12 साल की छोटी उम्र में उनके पिता जी का देहांत हो गया। कुछ समय बाद उनके माता जी का भी देहांत हो गया। अब सारा बड़े भाई पर था पर जब वे 17 साल के थे तो उनके बड़े भाई का भी देहांत हो गया।
सबसे पहले उन्होंने ब्रज भाषा में अपनी रचनायें लिखी बाद में खड़ी बोली का इस्तेमाल किया। 14 जनवरी 1937 में उनकी मृत्यु हो गई। जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। उनका जन्म वाराणसी में हुआ था।
उन्होंने कविता, नाटक, कहानी और उपन्यास सहित साहित्य की अनेक विधाओं में रचनाएँ कीं।
जय शंकर प्रसाद की द्वारा लिखे काव्य :
- झरना
- आँशु
- लहर
- प्रेम पथिक
- महाराणा का महत्व
- कानन कुसुम
- कामायनी (1935) आदि।
जय शंकर द्वारा लिखे गए उपन्यास :
- स्कंदगुप्त
- चंद्रगुप्त
- ध्रुवस्वामिनी
- जन्मेजय का नाग यज्ञ
- राज्यश्री
- कामना
- एक घूंट
जय शंकर प्रसाद द्वारा लिखी कहानियां :
- छाया
- प्रतिध्वनि
- आकाशदीप
- आंधी
- इन्द्रजाल आदि प्रमुख हैं।
परीक्षा तथ्य: कामायनी जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध महाकाव्यात्मक रचना है।
महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 को फ़रुखाबाद जिले में हुआ था। उनका महादेवी नाम रखने के पीछे ये कहानी है की उनके पीढ़ी में सात पीढ़ियों के बाद एक लड़की का जन्म हुआ था इसलिए उनका नाम महादेवी रखा गया था। पहले वे बौद्ध भिक्षुणी बनना चाहती थी पर महात्मा गाँधी के Contact में आने के बाद वे एक अच्छी समाज सेवी के रूप में सामने आई। 11 सितम्बर 1987 में उनका निधन हो गया।
महादेवी वर्मा द्वारा लिखे काव्य :
- नीहार (1930) में लिखी गई।
- रश्मि (1932) में लिखी गई।
- नीरजा (1934) में लिखी गई।
- सांध्यगीत (1936) में लिखी गई।
- दीपशिखा (1942)
- यामा और सप्तपर्णा आदि प्रमुख काव्य हैं।
महादेवी वर्मा के विविध संकलन : स्मारिका ,स्मृति चित्र ,संभाषण ,संचयन ,दृष्टिबोध आदि।
महादेवी वर्मा के पुनर्मुद्रित संकलन : यामा (1940) , दीपगीत (1983), नीलाम्बरा (1983) , आत्मिका (1983) आदि।
महादेवी वर्मा द्वारा लिखे निबंध : शृंखला की कड़ियाँ, विवेचनात्मक गद्य, साहित्यकार की आस्था तथा अन्य निबंध।
4. सुभद्रा कुमारी चौहान
सुभद्रा देवी द्वारा लिखे कहानी संग्रह : बिखरे मोती (१९३२) ,उन्मादिनी (१९३४) ,सीधे साधे चित्र
सुभद्रा देवी द्वारा लिखी कविताएँ -- मुकुल ,त्रिधारा
सुभद्रा देवी की कहानी की प्रसिद्ध पंक्तियाँ
- यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे। मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे॥
- सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
- "मुझे छोड़ कर तुम्हें प्राणधन सुख या शांति नहीं होगी यही बात तुम भी कहते थे सोचो, भ्रान्ति नहीं होगी।"
5. भारतेन्दु हरीशचंद्र
भारतेन्दु हरीशचंद्र का जन्म 9 सितंबर 1850 और मृत्यु 6 जनवरी 1885 को हुई थी। उत्तर प्रदेश के साहित्य इतिहास में उनका बहुत योगदान है। उन्हें आधुनिक हिंदी साहित्य का पितामह भी कहा जा सकता है। उनके पिता का नाम गोपाल चंद्र था। बड़ी बात ये है कि वे एक वेश्या परिवार से संबध रखने के बाद भी एक अच्छे साहित्यकार बने। उन्हें हिंदी के इलावा अंग्रेजी,उर्दू ,मराठी,भाषा का अच्छा ज्ञान था।
भारतेन्दु द्वारा लिखे नाटक : वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति, सत्य हरिश्चन्द्र ,श्री चंद्रावली,विषस्य विषमौषधम् , भारत दुर्दशा, नीलदेवी,अंधेर नगरी,प्रेमजोगिनी, सती प्रताप आदि।
भारतेन्दु द्वारा लिखे निबंध संग्रह : नाटक, कालचक्र, लेवी प्राण लेवी, भारतवर्षोन्नति
कैसे हो सकती है? ,कश्मीर कुसुम ,जातीय संगीत , संगीत सार ,हिंदी , स्वर्ग में विचार सभा आदि।
काव्यकृतियां : भक्तसर्वस्व,प्रेममालिका, प्रेम माधुरी, प्रेम-तरंग,उत्तरार्द्ध भक्तमाल,प्रेम-प्रलाप, होली, मधु मुकुल, राग-संग्रह, वर्षा-विनोद, विनय प्रेम, फूलों का गुच्छा, प्रेम फुलवारी, कृष्णचरित्र, दानलीला , तन्मय लीला आदि।
6. मैथिली शरण गुप्त / उत्तर प्रदेश के कवि और लेखक
इस तरह ब्रजभाषा जैसी समृद्ध काव्य भाषा को छोड़कर समय और संदर्भों के अनुकूल होने के कारण नये कवियों ने इसे ही अपनी काव्य-अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। हिन्दी कविता के इतिहास में गुप्त जी का यह सबसे बड़ा योगदान दिया।
मैथिलीशरण गुप्त के महाकाव्य : साकेत, यशोधरा
मैथिलीशरण गुप्त के खण्डकाव्य : जयद्रथ वध, भारत-भारती, पंचवटी, द्वापर, गुरु तेग बहादुर, गुरुकुल , जय भारत, युद्ध, झंकार, पृथ्वीपुत्र, वक संहार [क], शकुंतला, विश्व वेदना,सिद्धराज, नहुष, अंजलि और अर्घ्य, अजित, अर्जन और विसर्जन, काबा और कर्बला, किसान, कुणाल गीत, राजा प्रजा, विष्णुप्रिया, उर्मिला, लीला[ग], प्रदक्षिणा, दिवोदास आदि।
नाटक : शक्ति, सैरन्ध्री [क], स्वदेश संगीत, हिड़िम्बा, हिन्दू,चंद्रहास, रंग में भंग , राजा-प्रजा, वन वैभव [क], विकट भट , विरहिणी , वैतालिक आदि।
7. गोस्वामी तुलसीदास
गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के भक्ति काल के महान कवि माने जाते हैं। उनका संबंध राजापुर, चित्रकूट से माना जाता है। उन्होंने भगवान राम के जीवन और आदर्शों को जनभाषा में प्रस्तुत किया।
प्रमुख रचनाएँ:
- रामचरितमानस
- विनय पत्रिका
- कवितावली
- गीतावली
- दोहावली
- हनुमान चालीसा
8. सूरदास
सूरदास हिंदी साहित्य के महान भक्त कवि और कृष्ण भक्ति शाखा के प्रमुख कवि थे। उनकी रचनाओं में भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और प्रेम का अत्यंत सुंदर वर्णन मिलता है।
प्रमुख रचना:
- सूरसागर
- सूरसारावली
- साहित्य लहरी
सूरदास को सामान्यतः वात्सल्य रस का प्रमुख कवि माना जाता है।
परीक्षा तथ्य: सूरदास का संबंध ब्रजभाषा और कृष्ण भक्ति से विशेष रूप से जोड़ा जाता है।
9. कबीरदास
कबीरदास निर्गुण भक्ति धारा के महान संत-कवि थे। उनका साहित्य सामाजिक रूढ़ियों, पाखंड और धार्मिक आडंबरों का विरोध करता है। उनका संबंध वाराणसी से विशेष रूप से माना जाता है।
कबीर की भाषा को सामान्यतः सधुक्कड़ी कहा जाता है।
प्रमुख रचना/साहित्य:
- बीजक
- साखी
- सबद
- रमैनी
परीक्षा तथ्य: कबीर निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत कवि थे।
10.भारतेंदु हरिश्चंद्र
भारतेंदु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण साहित्यकारों में गिना जाता है। उनका जन्म वाराणसी में हुआ था। हिंदी साहित्य के आधुनिक विकास में उनके योगदान के कारण उन्हें “हिंदी नवजागरण का अग्रदूत” तथा “आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक” कहा जाता है।
प्रमुख रचनाएँ:
- अंधेर नगरी
- भारत दुर्दशा
- सत्य हरिश्चंद्र
- वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति
भारतेंदु के समय से हिंदी साहित्य में आधुनिक चेतना, राष्ट्रीय भावना और सामाजिक समस्याओं को प्रमुख स्थान मिला।
11. हरिवंश राय बच्चन
हरिवंश राय बच्चन हिंदी के प्रसिद्ध कवि थे। उनका जन्म बाबूपट्टी, प्रयागराज में हुआ था। हिंदी साहित्य में उन्हें विशेष रूप से उनकी काव्य रचना मधुशाला के लिए जाना जाता है।
प्रमुख रचनाएँ:
- मधुशाला
- मधुबाला
- मधुकलश
- निशा निमंत्रण
- एकांत संगीत
- क्या भूलूँ क्या याद करूँ
परीक्षा तथ्य: हरिवंश राय बच्चन की सबसे प्रसिद्ध कृति मधुशाला है।
12 : अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हिंदी के प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार थे। उनका संबंध आजमगढ़ क्षेत्र से माना जाता है।
प्रमुख रचनाएँ:
- प्रियप्रवास
- वैदेही वनवास
- चोखे चौपदे
- रसकलश
प्रियप्रवास उनकी प्रसिद्ध रचना है।
उत्तर प्रदेश से जुड़े प्रमुख उर्दू साहित्यकार
उत्तर प्रदेश हिंदी के साथ-साथ उर्दू साहित्य का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। विशेष रूप से लखनऊ, इलाहाबाद/प्रयागराज, अलीगढ़ और रामपुर जैसे क्षेत्रों का उर्दू साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
1. अकबर इलाहाबादी
अकबर इलाहाबादी प्रसिद्ध उर्दू शायर थे। उनका संबंध इलाहाबाद (प्रयागराज) से था। उनकी शायरी में व्यंग्य और सामाजिक आलोचना प्रमुख रूप से दिखाई देती है।
2. फिराक गोरखपुरी
रघुपति सहाय ‘फिराक’ गोरखपुरी प्रसिद्ध उर्दू शायर और साहित्यकार थे। उनका जन्म गोरखपुर में हुआ था।
उनकी प्रमुख कृतियों में गुल-ए-नग्मा विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
3. जोश मलीहाबादी
जोश मलीहाबादी प्रसिद्ध उर्दू कवि और शायर थे। उनका संबंध मलीहाबाद, लखनऊ से रहा। उनकी रचनाओं में क्रांतिकारी और प्रगतिशील विचारों की झलक मिलती है।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख कवि और लेखक : महत्वपूर्ण तथ्य
| साहित्यकार | उत्तर प्रदेश से प्रमुख संबंध | प्रसिद्ध रचना/पहचान |
|---|---|---|
| तुलसीदास | राजापुर, चित्रकूट | रामचरितमानस |
| सूरदास | ब्रज क्षेत्र | सूरसागर |
| कबीरदास | वाराणसी | बीजक |
| भारतेंदु हरिश्चंद्र | वाराणसी | अंधेर नगरी |
| मुंशी प्रेमचंद | लमही, वाराणसी | गोदान |
| जयशंकर प्रसाद | वाराणसी | कामायनी |
| हरिवंश राय बच्चन | प्रयागराज | मधुशाला |
| महादेवी वर्मा | फर्रुखाबाद | यामा |
| मैथिलीशरण गुप्त | चिरगाँव, झाँसी | भारत-भारती |
| हरिऔध | आजमगढ़ क्षेत्र | प्रियप्रवास |
| अकबर इलाहाबादी | प्रयागराज | उर्दू शायरी |
| फिराक गोरखपुरी | गोरखपुर | गुल-ए-नग्मा |
| जोश मलीहाबादी | मलीहाबाद, लखनऊ | प्रसिद्ध उर्दू शायरी |
UP GK में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 1. ‘रामचरितमानस’ के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: गोस्वामी तुलसीदास।
प्रश्न 2. प्रेमचंद का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर: लमही, वाराणसी।
प्रश्न 3. ‘गोदान’ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: मुंशी प्रेमचंद।
प्रश्न 4. ‘कामायनी’ के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: जयशंकर प्रसाद।
प्रश्न 5. ‘मधुशाला’ किसकी प्रसिद्ध रचना है?
उत्तर: हरिवंश राय बच्चन।
प्रश्न 6. हरिवंश राय बच्चन का संबंध किस शहर से था?
उत्तर: प्रयागराज।
प्रश्न 7. महादेवी वर्मा का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर: फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश।
प्रश्न 8. ‘भारत-भारती’ के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: मैथिलीशरण गुप्त।
प्रश्न 9. भारतेंदु हरिश्चंद्र का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर: वाराणसी।
प्रश्न 10. ‘अंधेर नगरी’ किसकी रचना है?
उत्तर: भारतेंदु हरिश्चंद्र।
प्रश्न 11. ‘प्रियप्रवास’ के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।
प्रश्न 12. कबीरदास का प्रमुख साहित्यिक संबंध किस शहर से माना जाता है?
उत्तर: वाराणसी।
प्रश्न 13. सूरदास की प्रसिद्ध रचना कौन-सी है?
उत्तर: सूरसागर।
प्रश्न 14. ‘यामा’ की रचयिता कौन हैं?
उत्तर: महादेवी वर्मा।
प्रश्न 15. ‘गुल-ए-नग्मा’ किसकी प्रसिद्ध कृति है?
उत्तर: फिराक गोरखपुरी।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश की साहित्यिक परंपरा भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्धि का महत्वपूर्ण हिस्सा है। तुलसीदास और सूरदास की भक्ति काव्य परंपरा से लेकर कबीर की सामाजिक चेतना, भारतेंदु के हिंदी नवजागरण, प्रेमचंद के यथार्थवादी साहित्य और छायावादी कवियों की काव्यधारा तक उत्तर प्रदेश ने हिंदी साहित्य को अनेक महत्वपूर्ण साहित्यकार दिए हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए उत्तर प्रदेश के प्रमुख कवि और लेखक एक महत्वपूर्ण UP GK विषय है। साहित्यकारों के जन्मस्थान, उपनाम, प्रमुख रचनाएँ और साहित्यिक काल को याद रखने से इस विषय से पूछे जाने वाले प्रश्नों को आसानी से हल किया जा सकता है।
UPPSC, UPSSSC, UPTET, पुलिस भर्ती, लेखपाल, RO/ARO, शिक्षक भर्ती तथा अन्य उत्तर प्रदेश आधारित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में यह जानकारी उपयोगी हो सकती है।
