हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा मंदिर- ज्वालामुखी मंदिर | hHmachal Pradesh ka sabse bada mandir | Biggest Temple of Himachal in Hindi

हिमाचल प्रदेश की परीक्षाओं में या आम तौर पर ये सवाल पूछा जाता है कि हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा मंदिर कौन सा है तो इसमें कुछ संदेह पैदा हो जाता है। इसमें मंदिर के बारे में पूछा जाता है न की शिव मंदिर, गणेश मंदिर,पार्वती मंदिर या फिर हनुमान मंदिर। इसलिए जवाब बिलकुल सही होना चाहिए। आइये जानते हैं हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा मंदिर कौन सा है। 

हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा मंदिर कौन सा है? | himachal pradesh ka sabse bada mandir  

हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा मंदिर:-हिमाचल प्रदेश को देव भूमि माना जाता है इसलिए यहां पर बहुत छोटे बड़े मंदिर हैं ,यहां का सबसे बड़ा मंदिर कांगड़ा जिले में स्थित मां ज्वालामुखी मंदिर है जो लगभग 3.6 किलोमीटर या फिर एकड़ में कहें तो लगभग 9 एकड़ में फैला हुआ है। ये भारत के सभी शक्ति पीठों में से प्रमुख शक्ति पीठ है। 

हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा मंदिर कौन है (Biggest temple of Himachal ) ये ही प्रश्न नहीं पूछा जाता है और भी Exam में पूछा जा सकता है इसलिए आइये। Exam Booster से कुछ ज्वालामुखी मंदिर के तथ्य जानने की कोशिश करते हैं जिससे छोटे से छोटा प्रश्न का उत्तर दिया जा सके। 

हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा मंदिर- ज्वालामुखी मंदिर


एग्जाम बूस्टर तथ्य (Important and Interesting  Information from an Exam Point of View)

1. 51 शक्तिपीठों में से एक

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव सती के दाह संस्कार के बाद उनके पार्थिव शरीर को ले जा रहे थे, तब जहाँ-जहाँ देवी सती के अंग गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने। कांगड़ा के इस स्थान पर माता सती की जीभ (Tongue) गिरी थी।

2. कोई मूर्ति नहीं, केवल 9 ज्वालाओं की पूजा

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ किसी प्रतिमा या मूर्ति की पूजा नहीं की जाती। चट्टानों की दरारों से प्राकृतिक रूप से निकल रही 9 ज्वालाओं को ही देवी के 9 रूपों (महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका और अंजीदेवी) के रूप में पूजा जाता है।

3. अकबर का असफल प्रयास

ज्वालामुखी मंदिर "हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा मंदिर"  ही नहीं इसके पीछे कुछ चमत्कार भी जुड़े हैं।  मुगल बादशाह अकबर ने इस ज्वाला को बुझाने की कोशिश की थी। उसने ज्वाला पर पानी डालने के लिए एक नहर बनवाई और उसे मोटे लोहे के पत्तरों से ढका, लेकिन ज्वाला बुझी नहीं। इसके बाद अकबर ने नंगे पैर आकर माँ के चरणों में सोने का छत्र चढ़ाया, जो चमत्कारिक रूप से एक अज्ञात धातु में बदल गया। वह छत्र आज भी मंदिर परिसर में मौजूद है।

4. वैज्ञानिकों के लिए आज भी रहस्य

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) और विदेशी वैज्ञानिकों ने इस प्राकृतिक गैस के सटीक स्रोत का पता लगाने के लिए कई बार अध्ययन किया, लेकिन प्राकृतिक ईंधन या तेल के विशाल भंडार का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। बिना किसी दृश्य ईंधन के सदियों से जलती यह ज्योति आज भी शोध का विषय है।

5. महाराजा रणजीत सिंह का योगदान

1813 ईस्वी में पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर का दौरा किया। उन्होंने माता के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा प्रकट करते हुए मंदिर के मुख्य गुंबद पर सोने की परत चढ़वाई और सोने का विशाल मुख्य द्वार बनवाया।

6. पांडवों द्वारा खोज की मान्यता

स्थानीय कथाओं के अनुसार, इस पवित्र स्थान की खोज सबसे पहले पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान की थी। बाद में नगरकोट (कांगड़ा) के राजा भूमिचंद ने सपने में संकेत मिलने के बाद यहाँ पहला मंदिर बनवाया था।

7. 'शयन आरती' की अनोखी परंपरा

मंदिर में दिन में 5 बार आरती होती है, लेकिन रात की 'शयन आरती' बेहद खास होती है। इस समय माता के विश्राम के लिए एक सुंदर बिस्तर सजाया जाता है, जिस पर आभूषण और वस्त्र रखे जाते हैं। मान्यता है कि रात्रि में देवी स्वयं यहाँ विश्राम करती हैं।

8. अनंत काल से जलती 'अखंड ज्योति'

यहाँ की मुख्य ज्वाला को 'अखंड ज्योति' माना जाता है। इतिहास में कई भीषण प्राकृतिक आपदाओं और युद्धों के बावजूद यह ज्योति कभी बुझी नहीं है और अनवरत जलती आ रही है।

एक या दो लाइन  जवाब:- अगर प्रश्न ये पूछा जाता है हिमाचल का सबसे बड़ा मंदिर कौन है ( Himachl ka sabse bada mandir kaun sa hai) तो आपका जवाब एक या दो लाइन में ये होना चाहिए। 

"हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा मंदिर कांगड़ा जिले में स्थित ज्वालामुखी मंदिर है,जो 3.6 किलोमीटर (9 एकड़) के Area में फैला हुआ है।"



Rakesh Kumar

नमस्ते, मैं राकेश कुमार हूँ। शिक्षा और सामान्य ज्ञान के क्षेत्र में मेरी गहरी रुचि है। इसी उद्देश्य से मैंने Gkpustak की शुरुआत की, ताकि विद्यार्थियों को एक भरोसेमंद प्लेटफॉर्म मिल सके जहाँ वे अपनी तैयारी को बेहतर बना सकें।

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