हिमाचल प्रदेश का गठन और पुनर्गठन : 1948 से 1972 तक का इतिहास | GK Pustak

हिमाचल प्रदेश का गठन और पुनर्गठन

हिमाचल प्रदेश आज भारत का एक पूर्ण राज्य है, लेकिन वर्तमान हिमाचल प्रदेश का स्वरूप एक ही दिन में तैयार नहीं हुआ। इसका वर्तमान प्रशासनिक और भौगोलिक स्वरूप कई चरणों से होकर विकसित हुआ। स्वतंत्रता के बाद पहाड़ी रियासतों के एकीकरण से लेकर 25 जनवरी 1971 को पूर्ण राज्यत्व प्राप्त करने और फिर 1972 में जिलों के पुनर्गठन तक हिमाचल प्रदेश के गठन की प्रक्रिया कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिवर्तनों से गुजरी।

हिमाचल प्रदेश का गठन 15 अप्रैल 1948 को हुआ। उस समय विभिन्न पहाड़ी रियासतों को मिलाकर हिमाचल प्रदेश को एक अलग प्रशासनिक इकाई बनाया गया। बाद के वर्षों में संविधान लागू होने, बिलासपुर के विलय, राज्य पुनर्गठन, किन्नौर के गठन, पंजाब पुनर्गठन और अंततः पूर्ण राज्यत्व के कारण हिमाचल प्रदेश का क्षेत्र और प्रशासनिक स्वरूप लगातार बदलता गया।

इसलिए हिमाचल प्रदेश के गठन को समझने के लिए इसकी यात्रा को वर्षवार समझना उपयोगी है।

हिमाचल प्रदेश के गठन की पृष्ठभूमि

स्वतंत्रता से पहले वर्तमान हिमाचल प्रदेश का क्षेत्र अनेक छोटी-बड़ी पहाड़ी रियासतों में विभाजित था। स्वतंत्रता के बाद इन रियासतों के एकीकरण और प्रशासनिक पुनर्गठन की आवश्यकता महसूस हुई।

हिमाचल प्रदेश सरकार के आधिकारिक विवरण के अनुसार, स्वतंत्रता के बाद क्षेत्र की 30 पहाड़ी रियासतों को मिलाकर 15 अप्रैल 1948 को हिमाचल प्रदेश का गठन किया गया। प्रारंभ में यह मुख्य आयुक्त द्वारा प्रशासित क्षेत्र था।

हिमाचल प्रदेश की 30 पहाड़ी रियासतों के बारे विस्तार से पढ़ें जिनका विलय हुआ था आजादी के बाद : 

15 अप्रैल 1948 — हिमाचल प्रदेश का गठन

15 अप्रैल 1948 हिमाचल प्रदेश के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है।

इसी दिन पहाड़ी रियासतों के एकीकरण से हिमाचल प्रदेश अस्तित्व में आया। प्रारंभिक हिमाचल में चार जिले थे—

  • चंबा
  • महासू
  • मंडी
  • सिरमौर

उस समय हिमाचल प्रदेश का प्रशासन मुख्य आयुक्त के अधीन था।

15 अप्रैल को आज भी हिमाचल दिवस के रूप में याद किया जाता है।

                    👉👉हिमाचल प्रदेश का गठन 15 अप्रैल 1948


1950 — हिमाचल प्रदेश Part C State बना

भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। संविधान लागू होने के साथ हिमाचल प्रदेश को Part C State का दर्जा मिला।

इस चरण में हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में परिवर्तन हुआ और इसे उपराज्यपाल के माध्यम से प्रशासित किया गया। उस समय विधानसभा और मंत्रिमंडल की व्यवस्था भी अस्तित्व में थी।

                       👉👉हिमाचल प्रदेश का Part C State का दर्जा


1954 — बिलासपुर का हिमाचल प्रदेश में विलय

हिमाचल प्रदेश के विस्तार में अगला महत्वपूर्ण चरण 1 जुलाई 1954 को आया।

इस दिन तत्कालीन बिलासपुर राज्य को हिमाचल प्रदेश में मिला दिया गया। इसके साथ बिलासपुर हिमाचल प्रदेश का एक जिला बन गया।

इस विलय के बाद हिमाचल प्रदेश के जिलों की संख्या चार से बढ़कर पांच हो गई।

                        👉👉 बिलासपुर का हिमाचल प्रदेश में विलय


1956 — हिमाचल प्रदेश केंद्रशासित प्रदेश बना

हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में 1 नवंबर 1956 एक महत्वपूर्ण तारीख है।

राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के बाद Part A, Part B और Part C राज्यों की पुरानी व्यवस्था समाप्त की गई। इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश को केंद्रशासित प्रदेश (Union Territory) का दर्जा मिला।

इस समय हिमाचल प्रदेश की विधानसभा व्यवस्था भी समाप्त कर दी गई थी।

इस प्रकार 1956 से हिमाचल प्रदेश एक केंद्रशासित प्रदेश के रूप में प्रशासित होने लगा।

                                 👉👉1956 में हिमाचल प्रदेश केंद्र शासित प्रदेश क्यों बना?


1960 — किन्नौर अलग जिला बना

1960 में तत्कालीन महासू जिले से सीमावर्ती चिनी तहसील को अलग करके किन्नौर जिला बनाया गया।

इस परिवर्तन के बाद हिमाचल प्रदेश में जिलों की संख्या छह हो गई।

किन्नौर का गठन हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में महत्वपूर्ण घटना थी क्योंकि इससे सीमावर्ती क्षेत्र के प्रशासन को अलग जिला स्तर पर व्यवस्थित किया गया।

                                       👉👉👉किन्नौर जिला कब बना?


1963 — विधानसभा की पुनर्स्थापना

हिमाचल प्रदेश में लोकतांत्रिक प्रशासन के विकास की दृष्टि से 1963 भी महत्वपूर्ण वर्ष है।

1963 में विधानसभा को पुनः स्थापित किया गया और लोकप्रिय मंत्रिमंडल का गठन हुआ। इस समय हिमाचल प्रदेश अभी भी केंद्रशासित प्रदेश था, लेकिन इसकी प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ।

                          👉👉👉हिमाचल प्रदेश में विधानसभा का इतिहास


1966 — हिमाचल प्रदेश का बड़ा भौगोलिक विस्तार

हिमाचल प्रदेश के वर्तमान भौगोलिक स्वरूप को समझने के लिए 1 नवंबर 1966 सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक है।

पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के परिणामस्वरूप पंजाब के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों को हिमाचल प्रदेश में शामिल किया गया।

इस परिवर्तन के बाद हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रफल और जनसंख्या में बड़ा विस्तार हुआ। आधिकारिक सरकारी विवरण के अनुसार कांगड़ा, शिमला, कुल्लू और लाहौल-स्पीति के क्षेत्र तथा पंजाब के कुछ अन्य क्षेत्र हिमाचल में शामिल किए गए। इनमें नालागढ़ क्षेत्र तथा तत्कालीन होशियारपुर और गुरदासपुर जिलों के कुछ क्षेत्र भी शामिल थे।

इस पुनर्गठन के बाद हिमाचल प्रदेश का क्षेत्रफल लगभग 55,673 वर्ग किलोमीटर हो गया और राज्य का भौगोलिक स्वरूप वर्तमान हिमाचल के काफी निकट पहुंच गया।

1966 के पुनर्गठन से जुड़े प्रमुख क्षेत्र

इस चरण में हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक स्वरूप में मुख्य रूप से निम्न क्षेत्रों का महत्व रहा—

  • कांगड़ा
  • कुल्लू
  • लाहौल-स्पीति
  • शिमला
  • नालागढ़ क्षेत्र
  • होशियारपुर क्षेत्र के कुछ हिस्से
  • गुरदासपुर क्षेत्र के कुछ हिस्से

यह परिवर्तन केवल सीमा परिवर्तन नहीं था, बल्कि हिमाचल प्रदेश के आगे के प्रशासनिक और राजनीतिक विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था।

         👉👉1966 में हिमाचल प्रदेश में कौन-कौन से क्षेत्र शामिल हुए?

         👉👉पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 और हिमाचल प्रदेश


1970 — राज्यत्व का रास्ता साफ हुआ

हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की प्रक्रिया 1970 में निर्णायक चरण में पहुंची।

18 दिसंबर 1970 को संसद ने State of Himachal Pradesh Act, 1970 पारित किया। इसके बाद हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

इसके परिणामस्वरूप अगले वर्ष हिमाचल प्रदेश भारत का पूर्ण राज्य बना।


25 जनवरी 1971 — हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्यत्व

25 जनवरी 1971 हिमाचल प्रदेश के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है।

इसी दिन हिमाचल प्रदेश को भारत के 18वें राज्य के रूप में पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।

इस प्रकार 15 अप्रैल 1948 को शुरू हुई हिमाचल प्रदेश की प्रशासनिक यात्रा 25 जनवरी 1971 को पूर्ण राज्यत्व तक पहुंची।

              👉👉हिमाचल प्रदेश का पूर्ण राज्यत्व — 25 जनवरी 1971


1972 — जिलों का पुनर्गठन

पूर्ण राज्य बनने के बाद हिमाचल प्रदेश की प्रशासनिक सीमाओं में एक और महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ।

1 सितंबर 1972 को जिलों का पुनर्गठन किया गया।

इस पुनर्गठन में—

  • हमीरपुर और ऊना को कांगड़ा जिले से अलग करके नए जिले बनाए गए।
  • तत्कालीन महासू जिले का पुनर्गठन किया गया।
  • शिमला और सोलन जिलों का नया प्रशासनिक स्वरूप सामने आया।

इस पुनर्गठन के बाद हिमाचल प्रदेश में 12 जिले हो गए।

यही प्रशासनिक पुनर्गठन वर्तमान हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों की व्यवस्था को समझने के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।

हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों का गठन

 👉👉👉हिमाचल प्रदेश के जिलों का पुनर्गठन 1972


हिमाचल प्रदेश के गठन और पुनर्गठन की समयरेखा

वर्ष/तिथिप्रमुख घटना
15 अप्रैल 1948हिमाचल प्रदेश का गठन
26 जनवरी 1950हिमाचल प्रदेश Part C State बना
1 जुलाई 1954बिलासपुर हिमाचल प्रदेश में मिला
1 नवंबर 1956हिमाचल प्रदेश केंद्रशासित प्रदेश बना
1960किन्नौर को अलग जिला बनाया गया
1963विधानसभा पुनः स्थापित हुई
1 नवंबर 1966पंजाब के पहाड़ी क्षेत्रों के विलय से हिमाचल का बड़ा विस्तार
18 दिसंबर 1970हिमाचल प्रदेश राज्य अधिनियम पारित
25 जनवरी 1971हिमाचल प्रदेश पूर्ण राज्य बना
1 सितंबर 1972जिलों का पुनर्गठन; 12 जिलों की व्यवस्था बनी

इन घटनाओं को एक साथ देखने पर स्पष्ट होता है कि हिमाचल प्रदेश का वर्तमान स्वरूप कई चरणों के प्रशासनिक पुनर्गठन से विकसित हुआ।

1948 से 1972 तक हिमाचल प्रदेश में क्या-क्या बदला?

इस पूरी अवधि को चार बड़े चरणों में समझा जा सकता है—

पहला चरण — 1948:
विभिन्न पहाड़ी रियासतों को मिलाकर हिमाचल प्रदेश का गठन हुआ।

दूसरा चरण — 1950 से 1963:
हिमाचल की संवैधानिक और प्रशासनिक स्थिति में कई परिवर्तन हुए। Part C State से केंद्रशासित प्रदेश बनने और फिर विधानसभा की पुनर्स्थापना तक प्रशासनिक व्यवस्था बदलती रही।

तीसरा चरण — 1966:
पंजाब पुनर्गठन के बाद हिमाचल प्रदेश का क्षेत्र काफी विस्तृत हुआ।

चौथा चरण — 1971–1972:
हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्यत्व मिला और उसके बाद जिलों का पुनर्गठन करके वर्तमान प्रशासनिक ढांचे की नींव मजबूत हुई।

हिमाचल प्रदेश के गठन को याद रखने का आसान क्रम

परीक्षा की दृष्टि से इसे इस क्रम में याद किया जा सकता है:

1948 → गठन
1950 → Part C State
1954 → बिलासपुर का विलय
1956 → केंद्रशासित प्रदेश
1960 → किन्नौर जिला
1963 → विधानसभा पुनर्स्थापना
1966 → पंजाब के पहाड़ी क्षेत्रों का विलय
1970 → राज्य अधिनियम
1971 → पूर्ण राज्यत्व
1972 → जिलों का पुनर्गठन

निष्कर्ष

हिमाचल प्रदेश का निर्माण एक क्रमिक प्रशासनिक प्रक्रिया का परिणाम था। 15 अप्रैल 1948 को पहाड़ी रियासतों के एकीकरण से शुरू हुई यह यात्रा 1950 के संवैधानिक परिवर्तन, 1954 में बिलासपुर के विलय, 1956 में केंद्रशासित प्रदेश बनने, 1960 में किन्नौर के गठन, 1966 में हिमाचल के भौगोलिक विस्तार और 1971 में पूर्ण राज्यत्व से गुजरती हुई 1972 के जिला पुनर्गठन तक पहुंची।

इसलिए हिमाचल प्रदेश के वर्तमान स्वरूप को समझने के लिए केवल 25 जनवरी 1971 के राज्यत्व को जानना पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे 1948 से शुरू हुई पूरी गठन और पुनर्गठन प्रक्रिया को समझना आवश्यक है।

यह पोस्ट हिमाचल प्रदेश सामान्य परिचय (LEVEL 1) के लिए एक आधारभूत पोस्ट के रूप में उपयोग की जा सकती है।

Rakesh Kumar

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